POLITICS IN INDIA (4) भारतीय राजनीति :: BEASTS OF BURDEN देश पर बोझ

POLITICS IN INDIA (4) भारतीय राजनीति
BEASTS OF BURDEN देश पर बोझ 

A TREATISE ON POLITICAL SYSTEM
By :: Pt. Santosh Bhardwaj  
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राजनीतिज्ञों को सेवानिवृति :: 
(1). सांसदों को पेंशन नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि यह रोजगार नहीं अपितु-बल्कि पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट के तहत चुनाव है। इसकी पुनर्निर्माण पर कोई सेवानिवृत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें फिर से उसी स्थिति में फिर से चुना जा सकता है। (वर्तमान में, उन्हें पेंशन मिलती है, सेवा के 5 साल होने पर)। 
इसमें एक और बड़ी गड़बड़ी यह है कि अगर कोई व्यक्ति पहले पार्षद रहा हो, फिर विधायक बन जाए और फिर सांसद बन जाए तो उसे एक नहीं, तीन-तीन पेंशनें मिलती हैं। यह देश के नागरिकों साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है जो तुरंत बंद होना ही चाहिए।
(2). केंद्रीय वेतन आयोग के साथ संसद सदस्यों का भत्ता संशोधित किया जाना चाहिए। वर्तमान में, वे स्वयं के लिए मतदान करके मनमाने ढंग से अपने वेतन व भत्तों में वृद्धि करते रहे हैं।
(3). सांसदों को अपनी वर्तमान स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली  त्यागनी चाहिए और भारतीय जन-स्वास्थ्य के समान स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में भाग लेना चाहिए।
(4). मुफ्त छूट, राशन, बिजली, पानी, फोन बिल जैसी सभी रियायत समाप्त होनी चाहिए। वे न केवल ऐसी  बहुत सी रियायतें प्राप्त करते हैं, बल्कि वे नियमित रूप से इसे बढ़ाते भी रहे हैं।
(5). संदिग्ध व्यक्तियों के साथ दंडित रिकॉर्ड, आपराधिक आरोप और दृढ़ संकल्प, अतीत या वर्तमान को संसद से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। कार्यालय में राजनेताओं के कारण होने वाली बकाया राशि, वित्तीय हानि, उनके परिवारों, नामांकित व्यक्तियों, संपत्तियों से वसुल की जानी चाहिए।
(6). सांसदों को भी सामान्य भारतीय लोगों पर लागू सभी कानूनों का समान रूप से पालन करना चाहिए।
(7). नागरिकों को एल.पी.जी. जैसी रियायतों को तब तक जारी रखना चाहिये जब तक सांसद, विधायक और जन प्रतिनिधि भोजनालय में रियायती दरों पर खाना-पीना जारी रखते हैं। 
(8). अगर सरकारी कर्मचारी 60 में सेवा निवृत होता है तो इनकी सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल ही होनी चाहिये।
OFFICIAL NUMBER OF VIP'S :: Britain :- 84, France :- 109,  Japan :- 125, Germany :- 142, USA :- 252, Russia :- 312, China is 435 & India has more than 5,79,092 BLOOD SUCKERS. The Supreme Court has said that after relinquishing office the politicians are just ordinary citizens and they do not deserve the felicities enlisted by Vasundhra Raje Sindhiya in the latest amendment.[28.05.2018] 
नेता आरती ::
आओ बच्चों तुम्हे दिखायें, शैतानी शैतान की। नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की
बड़े-बड़े नेता शामिल हैं, घोटालों की थाली में। सूटकेश भर के चलते हैं, अपने यहाँ दलाली में 
देश-धर्म की नहीं है चिंता, चिन्ता निज सन्तान की। नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की
चोर-लुटेरे भी अब देखो, सांसद और विधायक हैं। सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये, सचमुच के खलनायक हैं 
भिखमंगों में गिनती कर दी, भारत देश महान की। नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की
जनता के आवंटित धन को, आधा मंत्री खाते हैं। बाकी में अफसर ठेकेदार, मिलकर मौज उड़ाते हैं 
लूट खसोट मचा रखी है, सरकारी अनुदान की। नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की
थर्ड क्लास अफसर, फर्स्ट क्लास चपरासी है। होशियार बच्चों के मन में, छायी आज उदासी है
गंवार सारे मंत्री बन गये, मेधावी आज खलासी है। आओ बच्चों तुम्हें दिखायें, शैतानी शैतान की
नेताओं से बहुत दुखी है,जनता हिन्दुस्तान की
देश के सेवक या परजीवी :: भारत में कुल 4,120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक। प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है अर्थात 91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभग 1,100 करोड़ रूपये।
भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है। ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है, इन विधायकों और सांसदों पर।
इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर व्यय :-  एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और यानी कुल 7 पुलिसकर्मी की सुरक्षा मिलती है। 7 पुलिस का वेतन लगभग (25,000 रूपये प्रति माह की दर से) 1 लाख 75 हजार रूपये होता है। इस हिसाब से 4,582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख प्रति वर्ष है। इसी प्रकार सांसदों के सुरक्षा पर प्रति वर्ष 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं। Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए लगभग 16,000 जवान अलग से तैनात हैं, जिन पर सालाना कुल खर्च लगभग 776 करोड़ रुपया बैठता है। इस प्रकार सत्ताधीन नेताओं की सुरक्षा पर हर वर्ष लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं अर्थात हर वर्ष नेताओं पर कम से कम 50 अरब रूपये खर्च होते हैं, इन खर्चों में राज्यपाल, भूतपूर्व नेताओं के पेंशन, पार्टी के नेता, पार्टी अध्यक्ष, उनकी सुरक्षा आदि का खर्च शामिल नहीं है। यदि उसे भी जोड़ा जाए तो कुल खर्च लगभग 100 अरब रुपया हो जायेगा।
देश प्रति वर्ष नेताओं पर 100 अरब रूपये से भी अधिक खर्च करता है। यह 100 अरब रुपया देश वासियों से ही टैक्स के रूप में वसूला गया होता है।[22 .03.2018] 
संविधान में जानबूझकर की गई कमियाँ ::
भारतीय संविधान की निम्न मूलभूत कमियाँ जो जाहिर करती हैं कि इसके निर्माता अदूरदर्शी, अविवेकी थे। 
(1). कोई नेता चाहे तो दो सीट से एक साथ चुनाव लड़ सकता है,  लेकिन एक सामान्य व्यक्ति दो जगहों पर वोट नहीं डाल सकता। 
(2).  कोई व्यक्ति जेल मे बंद हो तो वोट नहीं डाल  सकता जबकि नेता जेल में रहते हुए चुनाव लड सकता है। 
(3). अगर कोई बेकसूर भी  जेल चला गया तो उसे जिंदगी भर कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, लेकिन एक अपराधी नेता चाहे जितनी बार भी हत्या या बलात्कार के मामले में जेल गया हो, फिर भी वो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जो चाहे बन सकता है।
(4). बैंक में मामूली नौकरी पाने के लिये ग्रेजुएट होना जरूरी है, लेकिन नेता अंगूठा छाप भी हो तो भी भारत का वित्त मंत्री बन सकता है।
(5). सेना में एक मामूली सिपाही की नौकरी पाने के लिये दसवीं पास होना जरूरी तो है ही 10 किलोमीटेर दौड़ और शारीरिक मापदण्डों को भी पूरा करना होगा मगर, नेता यदि अनपढ़-गंवार और लूला-लंगड़ा, अँधा-काना, गूँगा-बहरा हो तो भी वह देश का सर्वोच्च सेनापति-राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री बन सकता है और जिसके पूरे खानदान में आज तक कोई स्कूल नहीं गया, वो नेता देश का शिक्षामंत्री बन सकता है।
(6). जिस नेता पर अनगिनित मुकदमें दायर हों वो नेता गृह मंत्री बन सकता है।
Photo(7). 82 % अंक लाने वाला सामन्य श्रेणी का गरीब भारतीय प्रशासनिक सेवा, चिकित्सा, अभियांत्रिकी में प्रवेश नहीं पा सकता जबकि मात्र 28 % वाले को यह सब कुछ मिल जाता है। 
(8). एक गरीब ब्राह्मण के बच्चे को फीस के 80,000 रूपये चुकाने ही होंगे, जबकि आरक्षित वर्ग के एक उच्चाधिकारी, मंत्री, उद्योगपति हो यह माफ़ है ![01.04.2018]
अन्याय :: A retired person after rendering 30 to 36 years of service to the Govt. or the Dept., where he worked and for all his services the Dept. pay him salary which is of course treated as income and is liable for income tax. But after retirement, he is paid pension as a superannuation fund for his livelihood on account of serving for so many years. This is not an income for any services or work. This is just a deferred wage by the Dept. to the employee, who has served the Dept. for so many years. Then why Income tax?! The Govt. should to discontinue the levy of Income tax on pension. If MPs & MLAs pension is not taxable why employee's pension is Taxed?!
डेढ लाख वेतन पाने वाले साँसदों की तनख्वाह आयकर से मुक्त है; परन्तु 24 घंटे मौत की छाँव में रहने वाले सिपाही को बीस हजार तनख्वाह पर भी आयकर देना पडता है! साँसदों को परिवार के साथ रहते हुए भी हर साल पचास हजार मुफ्त फोन कॉल; घर सें हजारों किमी दूर बैठे सैनिक को एक कॉल भी मुफ्त नहीं! एक साँसद को फर्नीचर के लिए 75,000 हजार रु; सीमा पर सैनिक को ड्यूटी के दौरान बारिश से बचने के लिए टूटा छप्पर और अक्सर वो भी नहीं। साँसद को हर साल 34 हवाई टिकट मुफ्त; सैनिक ड्यूटी जाते हुए भी अपने पैसे से टिकट लेता है! साँसद को वाहन के लिए 4,00,000/=  का ब्याज मुक्त ऋण; एक सैनिक को घर के लिए लोन भी 12.55% दर से मिलता है। जो खेलते हैं, उन्हें एक करोड़ रु मिलता है; सरकार कहती है वो देश के लिए खेलते हैं, इसलिए! आसमान में हैलीकॉप्टर से लटकते, शहीद होते हुए जवान को कभी मिला एक करोड़। भारत में क्रिकेट और जबानी जंग लड़ने वालों, जीभ की लपा-लपी करने वाले राजनीतिबाजों-घोटालेबाजों को मिलता है, अरबों-खरबों; मगर जान से खेलने वालों, सरकारी कर्मचारियों, अध्यापकों को केवल दुत्कार मिलती है। [12. 10.2017]
🐲(4). More than Rs. 12,000 crore are spent annually over the salaries of the legislatures in India. They continue getting pension, security, allowances, housing, doctors and travel concessions even after retirement. The government which is not willing to give pension it armed forces and the employees extends the benefit to the politicians (most of whom are criminals of all shades); who are like parasites such as:- bad bugs, leeches, mosquitoes. In America even the president is an ordinary citizen, once he relinquishes the office.[25.02.2017]
🎃(3). The government servant is forced to retire at the age of 58-60 years of age, but these parasites are allowed to suck the blood of poor till death. Either all employees should be brought at par with them or they should retire from public life at 58 only. Listen to Maya, Diggy or Lalu & realise that they do not deserve to be there in the parliament.[22.08.2016]
🐬💮(2). One who draws salary from the government can not draw salary, perks, benefits from else where. But in India most the politicians are gainfully employed else where. Jethmalani, Sibble, Prashant & Shanti Bhushan, Chidambaram, Swami, Jaitly, Mallya, Sonia, Rahul and thousands of councillors, MLA's, MP's. ministers, industrialists are gaining against the law. Why the Supreme Court fails to take cognisance and why the income tax department do not act these fraudsters-politicians!?[21.08.2016]
💮(1). In India, the Privy Purse was a payment made to the royal families of erstwhile princely states as part of their agreements to first integrate with India in 1947 and later to merge their states in 1949 whereby they lost all ruling rights. The motion to abolish Privy Purses and the official recognition of the titles, was originally brought before the Parliament in 1969 and was defeated by one vote in the Rajy Sabha, 149 voting for and 75 against.
It was again proposed in 1971, and was successfully passed as the 26th Amendment to the Constitution of India in 1971. Then Prime Minister Indira Gandhi argued the case for abolition based on equal rights for all citizens and the need to reduce the government's revenue deficit. It was implemented after a two-year legal battle. In some individual cases however privy purses were continued for life for individuals, who had held ruling powers before 1947.
The netas from Delhi, Telangana and MP are new royals. In fact they are parasites. They not only get high salaries; they get subsidised: food, travel, housing, medical facilities, education to their wards in addition to extra income in the from of dolls, bribery, gifts. Every now and then they are found indulged in scandals, scams, rape, forgery, murder, loot, dacoity and what not?! And one head this list of highly paid unemployed is Kejriwal.
This is curious that the government do not want to give pensionery benefits to its employees, but wish to continue-extend all facilities to the legislatures. During the recent years these people have become burden over the exchequer and the common men. During the coming years a time will come when these people will suck all funds meant for development work. This is in addition to what they earn as bribery, commissions, frauds, scams, cheating, murders, forgery etc.etc.[08.03.2016]

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