RAM SETU-ADAM'S BRIDGE (राम सेतु-सेतु बन्ध)

RAM SETU-ADAM'S BRIDGE (राम सेतु-सेतु बन्ध)
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM  By :: Pt. Santosh Kumar Bhardwaj  
santoshkipathshala.blogspot.com   santoshsuvichar.blogspot.com jagatguru.blog.com   bhartiyshiksha.blogspot.com  hindutv.wordpress.com  santoshkathasagar.blogspot.com  hindutv.wordpress.com bhagwatkathamrat.wordpress.com   jagatgurusantosh.blog.com  
This is the oldest man made structure intact over the earth built in Treta Yug around 1,750,000 Year ago; connecting Shri Lanka and India at Rameshwaram. Its not unbelievable since stones are found on earth near Europe which float over the sea. Scientifically everything will float over water if its density is increased. Take the case of salt sea for instance. A chain of limestone shoals called Ram Setu or Pamban Bridge remains faint evidence to the former land connection between the Mannar islands of northwestern Shri Lanka and Rameshwaram in the Indian southwestern coast. It measured 3x34 Km.
The depth of the bridge extends from 3 ft to 30 ft in the sea up to 30 miles (-48 km) long which is not good enough to allow proper navigation. Some of the images available, show brick structures around the bridge. The radio carbon dating of the bridge verges on around 1,750,000 years, which roughly coincides with the Indian estimate of the mythical Treta Yug.
This superbly curved sandstone bridge relates it to the epic Ramayan. It was  built by the Vanar Sena (-monkey army) which constituted of the incarnations of demigods 33 crore in number. Nal and Neel the sons of Vishwkarma (-when he was in Vanar form, due to a curse) were the chief architects and engineers.
Pumice is one such stone that floats on water. Pumice is the name given to the hardened foam of lava when it comes out of a volcano. The inside of a volcano has very high pressure and can be as hot as 1600 degree Celsius. When the lava comes out of the volcano, it meets the cool air (-and sometimes sea water), which is around 25 degree Celsius. Some stones were scattered at Rameshwaram during the Tsunami, which still float on water.

Photo


राम सेतु नल-नील जो विश्कर्मा के पुत्र थे के द्वारा बनवाया गया। जिस वक्त इनका जन्म हुआ उस समय विश्कर्मा श्रापवश वानर योनि में थे। उन्होंने अपने पुत्रों को वास्तु शास्त्र का समुचित ज्ञान प्रदान किया।  
समुद्र में इन चट्टानों की गहराई सिर्फ़ 3 फुट से लेकर 30 फुट के बीच है,जो कि 1.5 से 2.5 मीटर तक पतले कोरल और पत्थरों से भरा पड़ा है।
श्री राम के आदेशानुसार नल तथा नील ने राम सेतु को बनाने के लिए समुद्र के किनारे पर भूमि का अवलोकन शुरू किया तथा पुल बनाने की प्रक्रिया को चार चरण में विभाजित किया गया।
(1). सर्वेक्षण, (2). कार्य योजना, (3). क्रियान्वयन और (4). समापन। 
फिर नल के नियंत्रण में समस्त वानर सेना ने राम सेतु का निर्माण शुरू कर दिया।
महर्षि वाल्मीकि ने युद्ध काण्ड [6.22,50-72], में सेतु में नल द्वारा प्रयोग की गयी सामग्री बताई है जिसमें सभी प्रकार के वृक्षों की लकड़ी प्रयोग की गयी साल वृक्ष, अशोक, आम, बांस, अश्वकर्ण, धावा, अर्जुन, पल्म्यरा, तिलक, सप्त्पूर्ण, कर्णिका इत्यादि।
वो वानर जो कि अधिक बलवान थे, उन्होंने हाथी के आकर की चट्टानों को ढोकर समुद्र तल में स्थापित किया। फिर बड़ी-बड़ी लकड़ियों को उन चट्टानों के ऊपर रखा गया इसके बाद बड़े पत्थरों को फिर तैरने वाले छोटे पत्थरों को रखा गया इस प्रकार सेतु की नींव तैयार की गयी।
इस तरह से राम सेतु को कई परतों में बनाया गया।
17,50,000 साल में इस सेतु के चारों ओर समुद्र से अत्यधिक रेत चिपक जाने से इसका निचला हिस्सा रेत कि चट्टान की तरह दिखता है पर यदि इसकी खुदाई की जाए तो नल द्वारा बनायीं गयी सेतु की नींव की लकड़ी तथा चट्टानों की परतें देखी जा सकती हैं।
राम सेतु में मूँगा चट्टानें मुश्किल से 1 से 2.5 मीटर की मिली है, बाकी भाग समुद्री रेत है। ये चट्टाने मूँगे के गोल, छोटे टुकडो जैसे है।
ऐसा लगता है कि इन टुकड़ों को कही और से लाकर यहाँ रखा गया है।
रामायण के अनुसार पुल की पूर्ण लम्बाई 100 योजन तथा चौड़ाई 10 योजन थी यानि इसका 10 :1 अनुपात था। वर्तमान में इसकी 35 KM लम्बाई तथा 3.5 KM चौड़ाई है, जिसका भी 10 :1 अनुपात है।इससे यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि पृथ्वी के अन्दर पाई जाने वाली चट्टानें 17,50,000 साल में किती सरकीं। 
वर्तमान में राम सेतु समुद्र तल से 2 मीटर नीचे है। World oceanographic report के अनुसार, पिछले 5,000 सालों में समुद्र तल का स्तर 9 फीट तक बढ़ा है।
जब इसका निर्माण किया गया तब समुद्र का तल 9 फीट से भी अधिक नीचा रहा होगा। 
महर्षि वाल्मीकि रामसेतु की प्रशंसा में कहते हैं -
अशोभतमहान् सेतु: सीमन्तइवसागरे।
वह महान सेतु सागर में सीमन्त (मांग) के समान शोभित था।
सनलेनकृत: सेतु: सागरेमकरालये। शुशुभेसुभग: श्रीमान् स्वातीपथइवाम्बरे॥
मगरों से भरे समुद्र में नल के द्वारा निर्मित वह सुंदर सेतु आकाश में छायापथ के समान सुशोभित था। 
Nisha Dwivedi's photo.
नासा के द्वारा अंतरिक्ष से खींचे गए चित्र से ये तथ्य अक्षरश: सत्य सिद्ध होते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

ENGLISH CONVERSATION (2) हिन्दी-अंग्रेजी बातचीत

ENGLISH CONVERSATION (3) हिन्दी-अंग्रेजी बातचीत

HINDU MARRIAGE हिन्दु-विवाह पद्धति