POLITICS IN INDIA (6) भारतीय राजनीति (समाजवाद)

POLITICS IN INDIA (6) भारतीय राजनीति (समाजवाद)
A TREATISE ON POLITICAL SYSTEM
By :: Pt. Santosh  Bhardwaj       
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भारत में वामपंथ :: वामपंथियों ऐसे लोग हैं जो दूसरों का माल हड़प कर अपना पेट मोटा करते हैं। वामपंथी ऐसे देशद्रोही लोग हैं, जो रहते-खाते भारत का हैं, मगर गुणगान चीन, रूस और पाकिस्तान का करते हैं। मार्स्कवास, नक्सलवाद, चर्मपंथ, माओवाद, लेनिनवाद इसके विभिन्न रूप हैं।  कार्ल मार्स्क ने भारत में आकर भाषा की जानकारी ने होने से यह समझा कि जमीन-जायदाद राज्य की सम्पत्ति हैं और जमीन पर काम करने वाला-कास्तकार राज्य के आधीन सेवक मात्र है। यूरोप में पला-पनपा यह दुराग्रह रूस, चीन जर्मनी जैसे मुल्कों में अपनी जड़ें जमा बैठा और इस दूषित विचारधारा वाले लोगों ने जार, सम्राट शाही का अन्त कर दिया और निरीह जनता पर घोर अत्याचर किये। लाखों बेकसूर लोगों को मार दिया गया। उनकी धन-सम्पत्ति लूट ली गई। 
भारत में इसका प्रादुर्भाव 1917 के बाद हुआ जब रूस में जार के पतन के बाद भारत में अंग्रेजों का बुरा वक्त शुरू हुआ। इसका मुख्य कारण विश्व युद्ध था। भारत में एम.एन.राय जैसे लोगों ने स्टालिन से प्रभावित होकर की। 
(1). वामपंथियों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रवादी आंदोलन को पूंजीपति और फासीवादी ताकतों के सहयोग के रूप में वर्णन किया और इसलिए उन्होंने ब्रिटिश प्रयासों का समर्थन किया। उन्होंने आज़ादी के आंदोलन में भारत को डोमिनियन स्टेट बनाये रखने में अंग्रेज़ों का साथ दिया। 
(2). वामपंथियों ने ब्रिटिश शासन के समय प्रस्ताव दिया था कि वो भारत के कई टुकड़े करके बहुराष्ट की नीति पर चलने के लिये जिन्ना के दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया और पाकिस्तान बनवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 
(3). वामपंथियों के लिए भारतीय राष्ट्रवाद बुर्जुआ राष्ट्रवाद है, लेकिन उनके लिए रूसी, चीनी राष्ट्रवाद सर्वहारा राष्ट्रवाद है। 
(4). वामपंथ का जन्म 1920 के दशक के मध्य में हुआ और इसने भारत में आर्यों को विदेशी आक्रांता कहा, द्रविड़ों को दक्षिणी भारत कहा और मुसलमानों का समर्थन किया जो आज तक जारी हैं। 
(5). वामपंथियों ने अपने मुस्लिम सदस्यों को मुस्लिम लीग के रैंक में प्रवेश कराया। पंजाब मुस्लिम लीग का घोषणापत्र  कम्युनिस्ट वकील, डैनील लतीफी द्वारा तैयार किया गया था। एक तरह से मुस्लिम लीग के पैदा होने में वामपंथियों का भी हाथ रहा है। 
(6). वामपंथियों ने भारत के विभाजन का समर्थन करते हुए, हिटलर के खिलाफ ब्रिटिश युद्ध को मुस्लिम लीग के सहयोगी रवैये की सराहना की, इसे इंपीरियल वॉर कहा और जर्मनी के खिलाफ अंग्रेज़ों का साथ दिया क्योंकि सोवियत संघ के स्टालिन ने संसार भर के कम्युनिस्ट लोगों को हिटलर के खिलाफ जंग में कूदने को कहा था। 
(7). वामपंथी नेताओं ने जुलूस और प्रदर्शनों का आयोजन करके पाकिस्तान आंदोलन को समर्थन दिया था। ई.एम.एस. नामबूदरीपद और ए.के. गोपालन (दोनों वामपंथियों के नेता थे) ने मुस्लिमों के साथ जुलूस का नेतृत्व किया, 'पाकिस्तान जिंदाबाद' और 'मोप्लिस्तान जिंदाबाद' चिल्लाकर नारे लगाए।  ख्वाजा अहमद अब्बास, जो स्वयं वामपंथी था ने कहा कि वामपंथ ने भारत को मार डाला था।
(8). भारत का विभाजन हुआ लेकिन वामपंथियों को तथाकथित सर्वहारा की तानाशाही स्थापित करने का अवसर ही नहीं मिला। जहाँ मिला वहाँ सत्यनाश किया जैसे बंगाल, त्रिपुरा, केरल। वामपंथियों  प्रभाव में आकर मजदूरों ने नाजायज़ मांगें मनवाने को जलूस, हड़ताल, आगजनी की और एक के बाद एक अच्छी कंपनियों में ताले जड़ते चले गये और कामगारों की जो दुर्गत हुई उसका बयान करना भी मुश्किल है। इन हड़तालियों को कहीं नौकरी नहीं मिली और इनकी औलादों के भूखे मरने की नौबत आ गई। 
(9). मार्क्सवादी इतिहासकार, जिन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस के शासनकाल में स्कूल की पाठ्यपुस्तकों को लेखन में अपनी आधिकारिकता बनाए रखी थी, ने भारत में मुस्लिम आक्रमणकारियों की बर्बर भूमिका को ढंक दिया और हिंदुओं के खिलाफ उनकी कट्टरता को छिपा दिया। वे हिंदू मंदिरों को तोड़ने को बर्बरता की बजाय आर्थिक आधार बताना पसंद करते थे। सांप्रदायिक मुसलमानों की विशिष्टतावादी और एक पक्षीय विचारधारा को सामाजिक समानता के लिए विचारधारा के रूप में पेश करते हुए उन्हें इस देश की सांस्कृतिक परंपरा को बदनाम करने में गर्व महसूस होता है। इन्होने हर दंगे के पीछे हिंदू राष्ट्रवादियों का हाथ बताया जबकि दंगों में वामपंथियों और कांग्रेसियों के विरुद्ध पक्के सबूत मौजद थे। जामिया मिलिया में एक सेमिनार के दौरान इन तथाकथित इतिहास कारों द्वारा छोटे-छोटे सवालों के जबाब भी नहीं दिया जा सके। यह जाहिर हो गया कि भारतीय संस्कृति, इतिहास का उनका ज्ञान नगण्य ही था। शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी बहस छिड़ गई और वामपंथियों ने अपनी आँखें बंद कर के शाहबानो मामले में कट्टरपंथियों का साथ दिया। 
(10). आज़ाद भारत में राजनीतिक पहचान के लिए मुस्लिम कट्टर सांप्रदायिक लोगों की शासन करने की आकांक्षा बरकरार रही। वामपंथियों ने भारतीय संघ मुस्लिम लीग (आई.यू.एम.एल.) को राजनीतिक सत्ता का पर्याप्त हिस्सा देकर मुस्लिम सांप्रदायिक मानसिकता को समर्थन दिया।  केरल में आज़ादी के बाद नई कट्टरवादी ए.आई.एम.एल. के साथ गठबंधन सरकार बनाई। उन्होंने "मालाबार में नया मुस्लिम बहुसंख्यक जिला बनाने के लिए आई.यू.एम.एल. के साथ मिलकर काम किया और इसका नाम मल्लपुरम रखा। 1980 में भारतीय मुस्लिमों ने अफगानिस्तान के सोवियत कब्जे के खिलाफ अमरीका को नैतिक समर्थन दिया। वामपंथी इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन रहे। उन्होंने नई सहस्राब्दी में अफगानिस्तान में तालिबान सरकार पर अमेरिकी हमले के खिलाफ अपने युद्ध के दौरान भारतीय मुसलमानों को पूरी तरह से समर्थन किया।  
(11).  ये शुरू से ही हथियार माफिया रहे हैं। 1919-20 में सोवियत संघ के पक्ष में पठानों से लड़ने के लिए वामपंथी नेता एम.एन.रॉय ही मास्को से ताशकन्द तक एक ट्रेन भर के हथियार लाया था। इन हथियारों का उपयोग पठनों ने भारत के पंजाबी हिन्दुओं का सफाया करने के लिए इस्तेमाल किया था। 
(12). पश्चिम बंगाल में 38 वर्ष तक मार्क्सवादी सरकार के शासन का रहस्य मुस्लिमों के चुनावी समर्थन के साथ है, जो मतदाताओं के करीब 25 प्रतिशत का गठन करते हैं। 1989 में मार्क्सवादी सरकार के पश्चिम बंगाल माध्यमिक बोर्ड ने 28 अप्रैल 1989 को आदेश जारी किया जिसके तहत, 28.04.1989 (संख्या Syl/89/1), जिससे मध्यकालीन इतिहास काल के बारे में बहुत सारी चीजों को पुस्तकों से हटा दिया गया, क्योंकि बंगाल के कट्टरपंथी मुस्लिम इसके विरुद्ध थे। बांग्लादेश मुस्लिम घुसपैठ पर चुप्पी रखी राष्ट्रीय हितों की कीमत पर, अपने वोटों को बेहतर बनाने के लिए है। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में कम्युनिस्ट शासन ने बांग्लादेश से मुसलमानों की घुसपैठ की अनुमति दी थी। यू.पी.ए. की कांग्रसी सरकार रहने तक मार्क्सवादी एक प्रॉक्सी सरकार की तरह कार्य कर रहे थे और यू.पी.ए. सरकार ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए  भारतीय इतिहास से छेड़छाड़  करने दी। 
(13). वामपंथी वही माफिया है जिसने बीसवीं और शुरुआती तीसवां दशक में स्वतंत्रता के लिए राष्ट्र की लड़ाई के खिलाफ युद्ध किया था और कांग्रेस को भारतीय पूंजीपतियों और जमींदारों पार्टी कहा था। 
(14). वामपंथी वो है जिन्होंने 1942 में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के साथ हाथ मिला लिया था और ब्रिटिश संरक्षण बड़े पैमाने पर पाया। 1942-45 के दौरान ब्रिटिश पुलिस के लिए ये देशभक्त आज़ादी के सिपाहियों के खिलाफ जासूसी और मुखबिरी करते थे। 
(15). आज़ादी की लड़ाई के समय गाँधी इन वामपंथियों के अंग्रेज़ों की दलाली से इतना तंग आ  गया था कि उसने इनके नेता सी.पी. जोशी को एक  चिट्ठी लिखी जिसमें वामपंथियों की भर्त्सना की गई थी। गाँधी हत्याकांड में कांग्रेस ने इनको फंसाने का प्रयास भी किया था और अधिकतर वामपंथी भूमिगत हो गए थे। 
(16). वामपंथियों नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अपने लिए बड़ा खतरा माना था क्योंकि उनका मानना था कि अगर आज़ाद भारत नेताजी के हाथों से संचालित हुआ तो इनका कोई भविष्य नहीं है और भारत के विभाजन का इनका सपना भी ख़त्म हो जाएगा। इसलिए अंग्रेज़ों के साथ मिलकर इन्होने नेताजी के खिलाफ खूब दुष्प्रचार किया जो अंग्रेज़ों के पैसों से प्रायोजित था। 
(17). वामपन्थियों ने एक बहुत बड़ा दुष्चक्र 1959 में रचा था। इन्होने भारतीय सेना में अपने जासूस घुसाने और सेना में तोड़-फोड़ कराने का षड्यंत्र रचा था।  इनके अनुसार सेना में दो फाड़ हो जाता और एक अंग को लेकर ये चीन की मदद से 1962 में सशत्र विद्रोह कर देते। फिर भारत पर इनके चेयरमैन माओ त्से तुंग का अधिकार हो जाता और  फिर ये माओ के निर्देशन में भारत पर राज करते।    
(18). 1948 में आज़ाद भारत गणराज्य के विरूद्ध इन्होंने हैदराबाद के निजाम और उसके रजाकारों के साथ हाथ मिलाकर सशस्त्र विद्रोह किया था। इन्होने तेलंगाना इलाको में एक सर्वहारा क्रांति के नाम पर 1948 से 1953 तक लगभग 2 लाख गरीब और निर्दोष किसानों को मरवा डाला था। 
(19). वामपंथियों ने 1948 में श्री रामकृष्ण को समलैंगिक, स्वामी विवेकानंद को एक हिंदू साम्राज्यवादी, श्री अरबिंदो को एक युद्ध पिपासु, श्री रबींद्रनाथ टैगोर को एक दलाल और स्वतंत्रता आंदोलन के दिग्गजों जैसे कि श्री सरदार पटेल को बिड़ला और टाटा के सूअर और हरामखोर जैसे शब्दों से बुलाया था। 
(20). वामपंथियों वही माफिया गिरोह है जो चीन के समर्थन में खुले तौर पर बाहर आ गया था जब चीन ने 1950 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया था, 1959 में दलाई लामा को अपने हजारों अनुयायियों के साथ निकाल दिया। आखिरकार 1962 में खुद भारत पर आक्रमण किया। 1962 के चीन आक्रमण में वामपन्थियों ने चीन का साथ दिया। "बीजिंग नजदीक, दिल्ली दूर" का नारा लगाया। कम्युनिस्ट वही माफिया गिरोह है, जिसने 1967-69 के माध्य से अपने अध्यक्ष के रूप में माओ त्से तुंग का स्वागत किया था, पश्चिम बंगाल और अन्य जगहों पर आतंकवाद और हत्याओं का अम्बार लगा दिया और मारे हुए पुलिस कर्मियों के सिर के साथ फुटबॉल खेला था।
PORTRAIT OF ANTI NATIONALS MAOISTS NAXALITES :: Congress has joined with its arch rival Communists-Maoists-naxalites in west Bangal.  They are already in league in Keral. Congress has already formed alliance with Nitish & Lalu in Bihar. Rahul's support to anti nationals is almost clear. Each & every effort is made to promote those who speak against Modi. They do not miss any opportunity to malign Modi & BJP, in spite of being exposed in Gujrat, National Herald and various scams, scandals.
(1). Apparently Kanhaeya is 28 yrs old. Even a Ph.D. program or MD medicine gets done by 28 yrs. Wonder what course, he is doing which is never ending or does not intend finishing?!
(2). Students coming from middle class families get down to working by 25 or latest by 28 yrs. This guy comes from such a poor background wonder how he can afford it not to work and earn!?
(3). Now he hires the country's best lawyers to defend him, wonder who is footing the bill and why?
(4). Most of these so called students register in universities to avail subsidised hostel stay & subsidised canteen food. Why should our tax money be used for such students who occupy the hostel permanently and deserving students have to look for PG accommodations. Why the tax payer be burdened with tax for these politically ambitious motivated leaders in the formation.?!
Let the respective political party fund their fun.
(5). He went for 3 months campaigning for Bihar elections. Wonder what happened to classes and who funds this?!
(6). They are not students. They are politicians in making, let them fight it out. Why is India being punished by their rubbish news on TV & newspaper. Only for TRP. And ndtv, India Today is no different
(7). All they want is to destabilise the growth story in vested political interest of the opposition. 
(8). They are not innocent students in any stretch of imagination. Nor are they genuine.
(9). अपाहिज़ बाप और 3,000 रुपये कमाने वाली गरीब माँ का बेटा कन्हैया, जब 75 लाख वकीलों की फीस देने के बाद सशर्त जमानत लेकर 30लाख की फॉर्चूनर से तिहाड़ से बाहर आता है तब कसम कजरी की, अपने देश की गरीबी पर इतराने को जी चाहता है! 8300 छात्रों के एक वर्ग द्वारा चुना गया छात्र नेता 125 करोड़ लोगो द्वारा चुने गये प्रधानमंत्री का मजाक उडाता है और मिडिया उसका सीधा प्रसारण करता है और कितनी आजादी चाहिये ?! [10.03.2016]
(10). There was a photograph of this so called student in which his female teacher was sitting in his lap, which clears the culture propagating in JNU. Its left to one to decide whether he is a student, sex manic, play boy or any thing else?! He may be a puppet or just a tool in the hands of some anti nationals. [11.03.2016]
कसम :: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का हिन्दु वैर जग ज़ाहिर है। राम-लला मन्दिर स्थल शुद्धिकरण प्रक्रिया की प्रतिक्रिया स्वरूप, इसी स्थान पर मस्जिद बनाने की कसम सार्वजनिक रूप से पहले कांग्रेसी प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने  20 नवम्बर, 1993  सार्वजनिक रूप से खाई। उसके ठीक 15 दिन बाद समाजवादी पार्टी ने 6 दिसम्बर, 1993 को लखनऊ के मुसलमानों की एक रैली में, जो कि बाबरी मस्जिद की जर्ज़र इमारत के ढ़हने पर आयोजित की गई थी‌, में मुलायम सिंह और उसकी पूरी समाजवादी पार्टी ने यह कसम खाई, "हम बाबरी मस्जिद के शहादत को बेकार जाने नही देंगे। हम सारे समाजवादी लोग रैली में आए हुए अल्पसंख्यक समाज के लोगों के सामने यह कसम खाते हैं कि समाजवादी पार्टी उसी स्थान पर फिर से बाबरी मस्जिद निर्माण कर के रहेगी।" मुलायम यादव को उसकी औलाद ने नकारा कर दिया और कांग्रेस को जनता ने (पाथेय कण जनवरी 2,000)। [28.05.2018]
Image result for rapist prajapti's photoअखिलेश-राहुल कहते हैं कि काम बोलता है। उसके मंत्रियों-विधायकों पर बलात्कार के आरोप ऐसे ही थोड़े लगे हैं। काम का अर्थ है सैक्स। दोनों ने अंग्रेजी का मात्र हिंदी अनुवाद ही तो किया है। बाप बलात्कारियों के लिए कहता है कि बच्चों से गलती हो जाती है। आजम कहते हैं बलात्कार सियासी हथकंडा है। धन्य हैं ऐसे बलात्कारियों के पक्षधर और उनको वोट देने वाले। अखिलेश  ने कल बलात्कारी की खुली हिमायत की और दुनियाँ ने देखा। [21.02.2017]
Rahul reached the striking students of film institute. He added himself with the so called Dalit suicide in Hyderabad by a university students. He reached Dadri and held BJP guilty of the well planned murder of a Muslim in the name of beef eating, though the state is ruled by Samaj Wadi Party and the main accused-culprit belongs to AAP. He motivated students when the RSS headquarter was attacked by so called students of JNU & Delhi university. He said that the students had the right to voice their concern in JNU (those who were voicing the so called concern was nothing but anti national slogans). He is blaming RSS for each & every event taking place in India these days. His nearness-new found love with the Marxist-communists-left is almost clear. In fact the Marxists are governed by foreign powers. They spoiled industry in Bangal and Keral in along with Congress. Congress did its best to ruin the country. The divisive forces are at work. Nitish call a terrorist his daughter. Lalu & congress supports him. A conclave constituting of Kejriwal, Nitish, Rahul, Mamta has sinister designs and they can go to any extreme to destabilise the country.
समाजवादी से कांग्रेसी बने सांसद :: One of the members of parliament's utterances in parliament and his constituency are meaningful and carries weight, since he is one time associate and confidant of a UP stall wart, when they pulled together in the same boat, along with the 3rd propagator. His protection of IIM activists, was in the news for quite some time. How he promoted, dreaded, notorious, dacoit queen to the echelons of power, in Parliament, is not a secret. His support to the dreaded dons/terrorists organisations, is giving sleepless nights to thousands of innocent people. His wealth, and it's increase in leaps and bounds, is before the law. A Government dependent over his support, can not act fairly-impartially under any circumstances. What is interesting, is the self imposed silence, of all the political parties, on the notoriety of this so called/self styled champion of the masses. A primary teacher acquiring such huge unaccounted wealth, is amazing, isn't it ?


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