POLITICS IN INDIA (6) भारतीय राजनीति :: RESERVATION आरक्षण

POLITICS IN INDIA (6) भारतीय राजनीति:: RESERVATION आरक्षण 
A CURSE ON GENERAL CATEGORIES सामान्य श्रेणी पर अत्याचार 
A TREATISE ON POLITICAL SYSTEM
By :: Pt. Santosh Bhardwaj
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*धर्म केवल ब्राह्मणों के त्याग, तपस्या, से ही कायम है। न्यूनतम आवश्यकताओं वाले, वेद, पुराण, उपनिषद, इतिहास का श्रवण, अध्ययन-अध्यापन करने वाले ब्राह्मणों ने समाज को हमेशां जोड़ा। शादी-व्याह की भट्टी-चूल्हा निम्न जाति की महिलायें बनाती थीं। सभी शुभ-मंगल कार्यों में उनका सहयोग होता था और उन्हें भरपूर दान-दक्षिणा दी जाती थी। धोबन के द्वारा दिये गये जल से ही कन्या के सुहाग की मंगल कामना की जाती थी। कुम्हार  द्वारा दिये गये मिट्टी के कलश पर ही देवताओ की पूजा-अर्चना होती थी। मुसहर के बनाये गए पत्तल और दोनों से ही देव पूजन किया जाता था और भोजन जिमाया जाता था। कहार के भरे जल से  देव पूजन होता था। विश्वकर्मा-बढ़ई की बनाई चौकी पर ही देवताओं की स्थापना होती थी और उनकी बनाई हुई चौकी पर ही दूल्हा बैठता था। हिन्दु से मुसलमान बने परिवारों के द्वारा सींये वस्त्र (जामे-जोड़े) पहनकर ही दूल्हा-दुल्हन शादी करते थे। हिन्दु से मुस्लिम बनीं औरतों की बनाई गई चूड़ियाँ पहनकर ही दुल्हन को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया जाता था। धारीकार डाल और मौरी को दुल्हे के सर पर रख कर देवताओं के आशीर्वाद के लिये द्वार चार कराता था। डोम-जो गंदगी साफ और मैला ढोने का काम किया करते थे, मरणोंपरांत उनके द्वारा ही प्रथम मुखाग्नि दी जाती थी। नाइन के गुंथे हुए आते से ही पूड़ी-कचौड़ी बनती थीं। नाई और ब्राह्मण साथ जाकर ही दूल्हे को शादी के लिए तय करते थे। 
इस तरह समाज के सभी वर्ग जब आते थे तो घर की महिलायें मंगल गीत का गायन करते हुये उनका स्वागत करती थीं और पुरस्कार सहित दक्षिणा देकर बिदा करती थीं। जाने कब और कैसे खुद भूखे-नंगे (मात्र एक वस्त्र, धोती) धारण करने वालों ने कब और कैसे लोगों को दलित, पिछड़ा, सर्वहारा, शोषित बनाकर उन्हें मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, करोड़पति-खरबपति बना डाला, उन बेचारों को खुद ही पता ही नहीं चला। 
उसका बच्चा 74%-84% अंक लेकर भी नौकरी को तरसता है, जबकि उनके द्वारा सताये-प्रताड़ित किये गये लोगों के बच्चे महज 0 से 24% लेकर डॉक्टर, इंजीनियर, उच्च प्रशासनिक अधिकारी कैसे बन जाते हैं, उसे आज तक नहीं मालूम !!!
अगर किसी नवजात शिशु को उसके असली माँ-बाप को सौंपना हो तो उसकी डी.एन.ए. जाँच की जाती है। मृतक की पहचान के लिये भी उसकी डी.एन.ए. जाँच की जाती है। तलाक के मुकदमे में शक होने पर बच्चे की डी.एन.ए.जाँच जरूरी होती है। 
अधिकतर जाति प्रमाण-पत्र नकली और पैसे लेकर जारी किये जाते हैं, उनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता। अकेले मुंबई में 25,000 लोग ऐसे हैं, जिनके जाति प्रमाण पत्र जाली हैं। अगर कोई व्यक्ति चार पीढ़ी तक आरक्षण लेकर भी आरक्षित है तो कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है। अतः पढ़ाई, लिखाई, नौकरी में आरक्षण का लाभ माँगने वालों की डी.एन.ए.पहचान होनी ही चाहिये। आजादी के बाद तो ऐसे लोगों की बाढ़ ही आ गई है। 
*8 बहन-भाइयों के साथ बादलपुर के छप्पर और इंद्रपुरी की जुग्गी-झोंपड़ी के 25 गज के मकान में रहने वाली, 5 रु की चुन्नी वाली, 500 रु की मास्टरनी (ब्राह्मण वृत्ति), 5 पैसे के टिकट पर झगड़ने वाली, भाषण पढ़ने वाली, हिन्दी की मास्टरनी होकर भी हिन्दी ठीक से नहीं पढ़ा पाने वाली, क्योंकि को अभी भी कूँकी पढ़ने वाली, मनु स्मृति दिखाती फिरती है, संस्कृत क्या समझेगी! मुख्य मंत्री (सत्ता संचालन-ब्राह्मण वृत्ति) बनी, सांसद बनी (सत्ता संचालन-ब्राह्मण वृत्ति), तिलक, तराजू और तलवार को चार जूते (यदि कोई व्यक्ति ब्राह्मणों-सवर्णों, के बारे में सोशल मीडिया जैसे फेस बुक वाट्स एप इत्यादि पर अपशब्द कहता है, तो उस पोस्ट का प्रिंट लेकर नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर ​"IT Act Section 66,153(A), 295 IPC"​ के तहत उस पर प्राथमिकी दर्ज़ कराई जा सकती है, उस व्यक्ति  खिलाफ़ गैर जमानती वारंट जारी हो सकता है) मारने वाली (जूते से अपनी जात बताती है), घर वाले को छोड़ कर कांसी के साथ रहने वाली, नानी है, मगर कुँवारी कहलाती है, जीते जी अपनी मूर्तियाँ बनवाने वाली, (जितने पैसे में मूर्तियाँ बनीं, उतने में एक लाख गरीबों को घर मिल सकते थे), खुद को जीते जी देवी कहने वाली, 5,000 करोड़ की नाजायज दौलत और फिर भी आरक्षण चाहिए! बुधिष्ट  बनकर भी माँस खाने वाली, बुधिष्ट बनकर भी दलित! आखिर दलित कौन हैं!?
*ब्राह्मणी की औलाद, ब्राह्मण से व्याही, लोक सभा की अध्यक्ष (सत्ता संचालन-ब्राह्मण वृत्ति), रक्षा मंत्री (सत्ता संचालन-ब्राह्मण वृत्ति) की बेटी, खरबों की नाजायज दौलत और फिर भी आरक्षण चाहिए। 
*एक मुसलमान, उसकी बेटी और नाती ने ब्राह्मण बन कर प्रधानमंत्री का पद हासिल किया और ब्राह्मणों को बदनाम किया।
*आडवानी ने चेताया कि यह तुम्हारी जीत नहीं जन आक्रोश है। तेली ने आरक्षण का समर्थन किया और 56 इंच की छाती दिखाई। दिल्ली, बिहार, गोरखपुर, फूलपुर, कैलाना खोया। सवर्ण का हक अनाधिकारी को दिया और अब कर्नाटक भी फिसल गया।
*बढ़ई, कोली, मल्लाह, पारवान, पश्तून जनजाति राष्ट्रपति बनकर भी दलित। फिर भी आरक्षण चाहिए। मुसलमान (मल्लेच्छ-मुसलमान और ईसाई) तो शूद्र से भी हीन, राष्ट्रपति बन गये। फिर भी आरक्षण चाहिए। 
*रामनाथ कोविंद-कोली, जेल सिंह-बढई, अब्दुल कलाम मुसलमान मल्लाह-मछुआरा, के. आर. नारायणन-पारवान नारियल तोड़ने वाला, ज़ाकिर हुसैन-पश्तून जनजाति, देश के राष्ट्रपति और फिर भी पिछड़े आरक्षण के मुहताज!मुसलमानों के साथ मिलकर पाकिस्तान बनाया। पाकिस्तानी या बांग्लादेश जाओ, वहीं आरक्षण लेना।
*बुध, जैन बनकर भी माँस खाना नहीं छोड़ा। मुसलमान बनकर भी जात नहीं बदली। दस्तकारी अंग्रजों ने बंद कराकर मजदूर बना दिया। बुधिष्ट, मझवी-मजहवी, भापे, सिख बनकर भी जात नहीं बदली। मुसलमान, ईसाई बनकर भी आरक्षण चाहिये!
*जिस सवर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य ने तुम्हें 1947-2019 तक राजा बनाया, उसी के बच्चों का निवाला छीनकर, तुमने उसे दे दिया, जिसने तुम्हें जूते मारे। उसी के पैसे से तुमने देश द्रोही को हज कराया।
*72 वर्ष तक सवर्ण का वोट लेकर, उसी का अमङ्गल किया।
*अपने मतलब के लिए कोई उन्हें हरिजन तो कोई सर्वहारा, शूद्र, पिछड़ा, दलित, शोषित, कहता है। परिश्रम का नहीं, हराम का खाते हैं। जात का प्रमाण पत्र देकर नौकरी लेते हैं। जात पूछो तो मिर्च लगती हैं। शास्त्र और मनु जी कहते हैं कि सवर्ण या शूद्र मनुष्य कर्मों से बनता है। हराम-लूट के खरबों हड़प कर भी दलित, शूद्र, पिछड़े सर्वहारा ही रहे!
SPOILING FUTURE :: JEE मेंस एंट्रेंस एग्जाम का कटऑफ, कुल 360 में से प्राप्तांक :-
सामान्य वर्ग = 74, पिछड़ा वर्ग = 45, अनुसूचित जाति SC = 29, अनुसूचित जनजाति ST = 24.
अर्थात ST का कटऑफ 6.66% और SC का 8% कटऑफ है।अनारक्षित  के लिए 20.5 % है।[14.05.2018]
In America 40% Negros who used to be slaves are in police, 32% in army, governors of at least 12 states without reservation due to their own labour.
पृथ्वी पर शासन किया क्षत्रियों ने, त्रेता युग में सूर्य वंशियों-इक्ष्वाकु वंशियों, कुरु वंश और यादवों का शासन था। महानंद नाई-शूद्र था। मौर्य गड़रिये-शूद्र थे। चंद्र गुप्त जैन बन गया, उसके वंशज बौद्ध हो गये। उसके बाद के बौद्ध वंशीय राजा देश को कमजोर करते चले गये और भारत में मुसलमान, यवन घुस आये। उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र आदि के मुख्यमंत्री एक के बाद एक शूद्र या यादव आदि हैं। भारत के राष्ट्रपति शूद्र, गृहमंत्री शूद्र, रक्षा मंत्री शूद्र, 67 साल से देश अम्बेडकर के अनुयायी चला रहे हैं और फिर भी कहा जाता है कि शूद्रों पर अत्याचार ब्राह्मणों ने किये। दूसरों को दोष देना आसान है, मुफ्त का माल हजम करना आसान है, सर्वणों का हक छीनना आसान है, मगर कठिन परिश्रम करना, पढ़ना-लिखना, खुद को सुधारना-तरक्की करना बहुत कठिन है।  अनुसूचित जाति-जनजाति का प्रमाणपत्र लेते-देते शर्म महसूस नहीं होती, मगर कोई शूद्र-दलित कह दे तो घोर अपमान!!![30.04.2018]
माननीय सर्वोच्च न्यायालय निर्णय :: माया और कांग्रेस ने 2 अप्रैल को भारत बन्द का आयोजन किया, जिसमें बहुत से लोग मारे गये, सार्वजिनक सम्पती को भारी नुक्सान पहुँचाया गया। BJP ने इसको रोकने की कोई कोशिश नहीं की, उलटे इस वर्ग को प्रोत्साहन देने की ही कोशिश की। 
गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फार्मेसी कराड के एक SC/ST जाति के स्टोर कीपर की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में उनके सीनियर ने विपरीत टिप्पणी दर्ज की।  स्टोर कीपर ने उनके विरुद्ध SC/ST एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR पुलिस  में दर्ज कर दी। पुलिस ने उन अधिकारियों को गिरफ्तार करने हेतु डायरेक्टर ऑफ टेक्निकल एजुकेशन से अनुमति माँगी जिसे मंजूरी नहीं मिली (पृष्ठ 3, 4)। इसके   करीब  5 साल बाद उक्त स्टोर कीपर ने डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन के विरुध्द FIR दर्ज करवा दी।  डायरेक्टर ने अग्रिम जमानत हेतु न्यायालय में याचिका पेश की जिस पर केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।
एट्रोसिटी एक्ट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के नागरिकों के विरुद्ध होने वाले कृत्यों को अपराध माना गया है, जैसे, उनका सामाजिक बहिष्कार करना, जान बूझ कर उन्हे सार्वजानिक रूप से अपमानित या प्रताड़ित करना,  इत्यादि। वो चाहें जब सवर्णों का अपमान कर सकते हैं। अपने अधीन कर्मचारियों की जिन्दगी तबाह करने की उन्हें छूट है। अपने अधीन महिला कर्मचारियों का शरीरिक शोषण करने की उन्हें खुली छूट है। अनेक कर्मचारी इन्हीं कारणों से आत्महत्या तक चुके हैं।  मगर सरकार को इससे क्या! 
विवाद का विषय यह है कि इस एक्ट के सेक्शन 18 के अनुसार, यदि  इस एक्ट के अंतर्गत यदि किसी की विरुद्ध FIR की जाती है, तो उसे अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती। इसका यह भी अर्थ निकाला गया कि यदि कोई शिकायत करे, तो उसे FIR दर्ज़ कर गिरफ्तार करना है, भले ही बाद में कोर्ट में केस झूठा सिद्ध हो पर उसे पहले जेल जाना होगा। 
विडम्बना ये है कि लूट, डकैती, बलात्कार, हत्या जैसे आरोपों में भी अग्रिम जमानत मिल सकती है, पर  एट्रोसिटी एक्ट के तहत नहीं (फैसले का पृष्ठ 15 एवं 24)। इस एक्ट का दुरूपयोग करते हुए  बड़ी सँख्या में  केस विशेष रूप से शासकीय एवं अर्धशासकीय सेवकों के विरुद्ध व्यक्तिगत स्वार्थवश  फाइल किये गए हैं।  
नेशनल क्राइम रिकॉर्डस  ब्यूरो, मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स  के डाटा (क्राइम इन इंडिया 2016 साँख्यिकी) के अनुसार वर्ष 2016 में SC केसेस में 5,347  केस  एवं  ST  के 912  केस झूठे पाए गये। वर्ष 2015 में 15,638 में से 11,024 केसेस में आरोपी मुक्त कर दिए गये, 495 केस वापस ले लिये गये (पृष्ठ 30)। वर्ष 2015 में कोर्ट द्वारा निष्पादित केस में  से  75 % से अधिक  केस में या तो आरोप सिद्ध नहीं हुये या केस वापस ले लिए गये (पृष्ठ 33)
कोर्ट ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए बने इस एक्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये। इसे  व्यकितगत  शत्रुता के कारण बदला लेने या ब्लैकमेल करने का हथियार बनने नहीं देना चाहिये (पृष्ट 25)। कानून निरपराध को बचाने  एवं  दोषी  को  दंड दिलाने के लिए है। अतः यदि प्रथम दृष्ट्या किसी ने अपराध नहीं किया है, तो सिर्फ किसी के आरोप लगा देने मात्र से सेक्शन 18 के तहत अग्रिम ज़मानत न देना उचित नहीं है। इस तरह  स्वतंत्रता  के मूल संवैधानिक अधिकार  का हनन होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो शासकीय सेवकों  का कार्य निष्पादन कठिन होगा। सामान्य  नागरिक को भी इस एक्ट के तहत गलत केस में फँसा देने की धमकी दे कर  ब्लैक मेल किया जा सकता है (पृष्ठ 67)।  
अंततः कोर्ट ने कहा कि एट्रोसिटी  एक्ट के केस में अग्रिम ज़मानत देने पर कोई रोक नहीं है,अगर प्रथम दृष्टया केस दुर्भावनावश फ़ाइल किया गया हो। निरपराध नागरिकों को गलत आरोपों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए डी. एस.पी. द्वारा समयबद्ध प्राथमिक जाँच की जानी चाहिए एवं केस रजिस्टर होने के बाद भी गिरफ़्तारी आवश्यक नहीं है। इस एक्ट के हो रहे दुरूपयोग के मद्देनज़र शासकीय सेवकों को बिना नियुक्तिकर्ता अधिकारी की अनुमति के गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा। गैर शासकीय सेवकों के केस में  जिले  की वरिष्ठ पुलिस सुपरिंटेंडेंट की अनुमति आवश्यक होगी (पृष्ठ 86-87)।
मजे की बात यह है कि हो हल्ला करने वाली माया के काल में ही इस आदेश को उत्तर प्रदेश में बदल दिया गया था। आज हर पार्टी स्वर्ण की जान की दुश्मन है। क्या कर गलत कानून पर रोक लगाने को कोर्ट में जाना होगा?! और अगर कोर्ट गलत कानून पर रोक लगाये, तो तुम देश में आग लगा दो?![11.04.2018]
GROUND REALITY :: ट्रेन में सफर कर रहे बाप ने अपने बेटे से मूँगफली बेच रहे युवक की ओर इशारा करते हुए कहा, "देख बेटा अगर तू पढ़ाई नही करेगा, तो इसी अनपढ़ की तरह मूँगफली बेचेगा। मूँगफली बेचने वाला, "मैने MBA किया है, परंतु सामान्य वर्ग से हूँ"। [22.04.2018] 
Mallikarjun Khadge, the DALIT-OPPRESSED LEADER and congress opposition leader in Lok Sabha, made a huge drama in Lok Sabha and wept in front of the PM.
He said, "In this country, please allot us a small piece of land and thereby allow  Dalits so that they can also lead a dignified life!"
With in 15 minutes at same place, the PM showed Mallikarjun Khadge the details of his holding of  property!
Rs.500 crore worth complex  at Banneru Ghatt road in Bangalore.
Coffee plantation of 300 Acre at Chickmaglore.
In the same district, he has one Rs. 50 Crore valued House.
At Kengeri, he is holding a Farm house of 40 acre.
Near to M. S. Ramayya college, he holds one building of 25 crores.
One Bungalow at R T Nagar, in Bangalore!
17 acre Land at Ballari Road.
Three floors building at Indira Nagar.
Two bungalows at Sada Shiv Nagar, in Bangalore.
Apart from this, he and his relatives holding so many BENAMI real estate properties at Mysore, Gulbarga, Chennai, Goa, Poona, Nagpur, Mumbai and Delhi.
From where has this come ?! Why the government not acting against him?! [04.04.2018]
"अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अम्बेडकर को कभी भी ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष न बनाता।" [सरदार वल्लभ भाई पटेल]
सरदार पटेल और अम्बेडकर संवाद :: संविधान निर्माण चल रहा था।। इसमें सरदार पटेल भी संविधान निर्माताओं की लिस्ट में शामिल थे। अम्बेडकर ने आरक्षण की मांग का तुर्रा छोड़ दिया। 
सरदार पटेल :-"आरक्षण गलत है, इसको हटाओ।"
अम्बेडकर :- "नहीं, ये मेरी कौम के लोगों के लिए है।"
सरदार :- 'कौन सी तुम्हारी कौम? हम सब भारतीय हैं, आज़ादी के बाद आज देश का हर वर्ग भूखा नंगा है, इसलिए किसी वर्ग विशेष को ये सुविधा देना गलत है।"
अम्बेडकर ( चीखते चील्लाते हुए) :- "मैं आरक्षण देना चाहता हूँ, अगर मुझे रोका गया तो मैं कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दूंगा।"
सरदार पटेल :- "देखो भीमराव, तुम वो नहीं देख पा रहे जो मैं देख पा रहा हूँ। स्वार्थ की राजनीति ने तुम्हारी आँखों में पट्टी बाँध दी है। अगर आज किसी जाति विशेष को आरक्षण दिया गया तो भविष्य के भारत में रोज एक नई जाति आरक्षण मांगेगी और देश की अखंडता पर खतरा उत्पन्न होगा .जो दलित और गरीब है उनके लिए हम दूसरे हर तरह के उपाय करने को तैयार हैं, जैसे मुफ़्त शिक्षा, मुफ़्त स्कूल, उनके लिए सस्ते घर, रोजगार इत्यादि।
हम उन्हें इतना काबिल बनाये ताकि वो खुद के दम पर आगे बढ़ सकें, न कि आरक्षण की बैशाखी से या मुफ्तखोरी से। तुम किसी अयोग्य को सत्ता पर बैठाकर देश को बर्बाद क्यों करना चाहते हो?"
अम्बेडकर (चीखते हुए)  :- "आरक्षण होकर रहेगा।"
ये सुनकर लौह पुरुष सरदार पटेल,जो कभी किसी के आगे नहीं झुकते थे, मजबूरी में उन्हें अम्बेडकर के कमरे से बाहर आना पड़ा और नेहरू से उन्होंने कहा था कि "ये आपने किस बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बना दिया, ये तो मानसिक उन्मादी प्रतीत होता है। इसमें दूरदर्शिता की भारी कमी और अंग्रेज़ियत मानसिकता की गन्दगी भरी है। अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो इसे कब का इसके पद से हटा चुका होता। ये व्यक्ति भारत का दुर्भाग्य साबित होगा। तन से ज्यादा इसका मन काला है। हम हर गरीब दलित के हक़ की बात करने को तैयार हैं,  लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं की भूखे मर रहे सवर्णों की क़ुरबानी दे दी जाये?"
ये सुनकर नेहरू मौन रहा। उसके पास कोई जवाब न था। 
सरदार पटेल ने अंतिम साँस ली और अखंड भारत के जनक सरदार की मृत्यु हो गयी। जानकार कहते हैं कि अगर सरदार ज़िंदा होते तो भारत का वो संविधान जो अम्बेडकर ने पेश किया था, वो लागू न हो पाता क्योंकि वो संविधान देश को बर्बाद करने वाली  दीमक की  तरह है।
आज की परस्थितियों को देखें तो यह बात बिलकुल सही साबित होती दिख रही है। कम योग्यता वाले व्यक्ति समाज के उच्च पदों पर बैठे हैं। आरक्षण की वजह से जो चपरासी की योग्यता वाले है वह डॉक्टर, जज, इंजिनियर जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे है  जिससे देश को कोई लाभ नहीं बल्कि नुकसान हो रहा है।
अगर इसे तत्काल नहीं रोका गया तो देश को इतना नुकसान होगा की उसको कभी भी सुधारा नहीं जा सकता।परन्तु मोदी या वोट के भूखे-लगे राजनीति बाजों से उम्मीद मत रखो। हार्दिक, गूजर, जाट, मराठी आरक्षण मांगेंगे तो जरूर, मगर दोगे कहाँ से ?!
दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला :: सामान्य श्रेणी में कोई भी अन्य वर्ग का व्यक्ति (OBC, SC, ST) अब नौकरी या कॉलेज मे आवेदन नही कर सकता। उसे अपनी ही श्रेणी के तहत आवेदन करना होगा। देश में आरक्षण के नाम पर OBC को 27%, SC को 15% और ST को 7.5% यानि 85% जनसँख्या को केवल 49.5% आरक्षण और बाकि बचा 50.5% अघोषित आरक्षण मात्र 15% सवर्णो के हिस्से में बच गया है और यही फार्मूला पूरे देश में लागू होने वाला है। यह सामान्य श्रेणी के आवेदकों के साथ घोर दुर्व्यवहार है। 
फैसला :: आरक्षित वर्ग के व्यक्तियों को सिर्फ आरक्षण उनके वर्ग में ही मिलेगा चाहे उसका मेरिट में कितना ही ऊँचा स्थान क्यों न हो। अगर कोई जाति प्रमाण पत्र देता है तो उसे आरक्षित क्षेत्र में ही जगह मिलेगी और वह अनारक्षित कोटा में जगह नहीं बना सकता। रोस्टर प्रणाली के तहत मुकदमा किया था और वादी विजयी हुए। Hon. Supreme Court has clarified that it is applicable only when a candidate has availed reservation.[03.12.2017]
RPSC (Rajasthan Public Service Commission Ghooghara Ghati, Jaipur Road, Ajmer) ने College Lecturer Maths का result घोषित कर दिया है। जो अभ्यर्थी 200 में से 8.72 (4%) अंक लेकर शिक्षक बने हैं वे छात्रों का भविष्य कैसा बनायेंगे यह सोचनीय है! जो 105.8 अंक लेकर भी शिक्षक नहीं बन पाये उनके साथ घोर अन्याय है और देश के भविष्य के हित में नहीं है। [20.09.2017] 
IMPEACHMENT of A DISTINGUISHED JUDGE OF THE GUJARAT HIGH COURT BY PARLIAMENT :: Justice J B Pardiwala a distinguished Parsi judge of the Gujarat High Court, made the following remarks in his recent judgement in Hardik Patel case on Reservations. Some disgruntled parliamentarians wish to bring impeachment against him due to the desire to drag the country back to 19th century. His verdict noted, "If I am asked by any one to name two things, which has destroyed this country or rather, has not allowed the country, to progress in the right direction, then the same is, (1) Reservation and (2) Corruption. It is very shameful for any citizen of this country to ask for reservation after 65 years of independence. When our Constitution was framed, it was understood that the reservation would remain for a period of 10 years, but unfortunately, it has continued even after 65 years of independence. The biggest threats, today, for the country is corruption. The countrymen should rise and fight against corruption at all levels, rather than shedding blood and indulging in violence for the reservation. The reservation has only played the role of an amoeboid monster sowing seeds of discord amongst the people. The importance of merit, in any society, cannot be understated."
Primarily, the persons party to it are basically from the most corrupt party in India and are responsible for injustice made to general categories for 65 years.
Some of the signatories are :: Anand Sharma, Digvijay Singh, Ashwani Kumar, P L Punia, Rajeev Shukla, Oscar Fernandes, Ambika Soni, B K Hari Prasad (all Congress), D Raja (CPI), K N Balagopal (CPI-M), Sharad Yadav (JD-U), S C Misra and Narinder Kumar Kashyap (BSP), Tiruchi Siva (DMK) and D P Tripathi (NCP)).
The time has come when these parliamentarians should be paid in the same coin.[20.09.2017]
ANT & GRASSHOPPER :: The Ant works hard in the withering heat all summer building its house and laying up supplies for the winter. The Grasshopper thinks the Ant is a fool and laughs dances plays the summer away. Come winter, the Ant is warm and well fed. The Grasshopper has no food or shelter so he dies out in the cold.
INDIAN SITUATION :: The Ant works hard in the withering heat all summer building its house and laying up supplies for the winter. The Grasshopper thinks the Ant's a fool and laughs dances plays the summer away. Come winter, the shivering Grasshopper calls a press conference and demands to know why the Ant should be allowed to be warm and well fed while others are cold and starving.
NDTV, Times Now, CNN IBN, BBC, CNN, Asia net show up to provide pictures of the shivering Grasshopper next to a video of the Ant in his comfortable home with a table filled with food.
The World is stunned by the sharp contrast. How can this be that this poor Grasshopper is allowed to suffer so!? Arundhati Roy stages a demonstration in front of the Ant's house. Medha Patkar goes on a fast along with other Grasshoppers demanding that Grasshoppers be relocated to warmer climates during winter. Maya Wati states this as gross injustice made to Dalits. 
The Internet is flooded with online petitions seeking support to the Grasshopper
CPM in Kerala immediately passes a law preventing Ants from working hard in the heat so as to bring about equality of poverty among Ants and Grasshoppers.
Railway minister allocates one free coach to Grasshoppers on all Indian Railway Trains, aptly named as the Grasshopper Rath.
Finally, the Judicial Committee drafts the Prevention of Terrorism Against Grasshoppers Act' [POTAGA], with effect from the beginning of the winter..
Education minister makes Special Reservation for Grasshoppers in Educational Institutions in Government Services.
The Ant is fined for failing to comply with POTAGA and having nothing left to pay his retroactive taxes, it's home is confiscated by the successive Governments and handed over to the Grasshopper in a ceremony covered by NDTV, Times Now, CNN IBN, BBC, CNN.
Arundhati Roy calls it A Triumph of Justice.
Railway minister calls it Socialistic Justice.
CPM calls it Revolutionary Resurgence of Downtrodden
Many years later...
The Ant has since migrated to the US and set up a multi-billion dollar company in Silicon Valley,
100 s of Grasshoppers still die of starvation despite reservation somewhere in India. And as a result of losing lot of hard working Ants and feeding the grasshoppers, India is still a developing country...!!
आरक्षण और समाजवाद का परिणाम :: (1). अर्थशास्त्र परीक्षा में पूरी की पूरी कक्षा अनुतीर्ण हो गई। कक्षा के विद्यार्थियों का अटल विश्वास था कि “समाजवाद सफल होगा और न कोई गरीब होगा और न कोई धनी होगा”। वे समाजवाद को सबको समान करने वाला एक महान सिद्धांत मान बैठे थे! समाजवाद के अनुरूप सफलता पाने वाले सभी छात्रों के विभिन्न ग्रेड का औसत निकाला गया और सबको वही एक ग्रेड दिया गया। पहली परीक्षा के बाद, सभी ग्रेडों का औसत निकाला गया और प्रत्येक छात्र को B ग्रेड प्राप्त हुआ। 
जिन छात्रों ने कठिन परिश्रम किया था, वे परेशान हो गए और जिन्होनें कम ही पढ़ाई की थी, वे खुश हुए।  
दूसरी परीक्षा के लिए कम पढ़ने वाले छात्रों ने पहले से भी और कम पढ़ाई की और जिहोनें कठिन परिश्रम किया था उन्होंने यह तय किया कि वे भी मुफ्त की ग्रेड प्राप्त करेंगे और उन्होंने भी कम पढ़ाई की। दूसरी परीक्षा का ग्रेड D था, इसलिए कोई खुश नहीं था।  जब तीसरी परीक्षा हुई तो ग्रेड F हो गया। 
जैसे-जैसे परीक्षाएँ आगे बढ़ने लगीं स्कोर कभी ऊपर नहीं उठा, बल्कि आपसी कलह, आरोप-प्रत्यारोप, गाली-गलौज और एक-दूसरे से नाराजगी के परिणाम स्वरूप कोई भी नहीं पढ़ता था, क्योंकि कोई भी छात्र अपने परिश्रम से दूसरे को लाभ नहीं पहुँचाना चाहता था। अंत में सभी आश्चर्यजनक रूप से फेल हो गए और प्रोफेसर ने उन्हें बताया कि इसी तरह “समाजवाद” भी अंततोगत्वा फेल हो जाएगा, क्योंकि इनाम जब बहुत बड़ा होता है तो सफल होने के लिए किया जाने वाला उद्यम भी बहुत बड़ा होगा। परन्तु जब सरकार सारे अवार्ड छीन लेगी तो कोई भी न तो सफल होना चाहेगा और न ही सफल होने की कोशिश करेगा। 
निम्नलिखित पाँच सर्वश्रेष्ठ उक्तियाँ इस प्रयोग पर लागू होती हैं।  
(1.1). आरक्षण और समाजवादी व्यवस्था समृद्ध व्यक्ति को उसकी समृद्धि से बेदखल करके गरीब को समृद्ध बनाने का क़ानून है जो भारत या कम्युनिष्ट देशों में लागू है। 
(1.2). जो व्यक्ति बिना कार्य किए कुछ प्राप्त करता है, अवश्य ही परिश्रम करने वाले किसी अन्य व्यक्ति के इनाम को छीन कर उसे दिया जाता है।  
(1.3). सरकार तब तक किसी को कोई वस्तु नहीं दे सकती, जब तक वह उस वस्तु को किसी अन्य से छीन न ले।
(1.4). सम्पदा को बाँट कर उसकी वृद्धि नहीं की जा सकती। 
(1.5). जब किसी राष्ट्र की आधी आबादी यह समझ लेती है कि उसे कोई काम नहीं करना है, क्योंकि बाकी आधी आबादी उसकी देख-भाल कर रही है और बाकी आधी आबादी यह सोच कर कुछ अच्छा कार्य नहीं कर रही कि उसके कर्म का फल किसी दूसरे को मिल रहा है, तभी उस राष्ट्र का पराभव शुरु हो जाता है।
(2). संविधान का निर्माण चल रहा था। सरदार पटेल भी संविधान निर्माताओं में शामिल थे। अम्बेडकर ने आरक्षण का तुर्रा छोड़ा। सरदार पटेल ने गलत बताते हुए इसे हटाने को कहा। अम्बेडकर ने इसे अपनी कौम के लिये आवश्यक ठहराया। पटेल ने पूछा कि कौन सी कौम की बात कर रहा था? सविंधान तो पुरे भारत का बन रहा था! आज़ादी के बाद देश का हर वर्ग भूखा नंगा था और इसलिए किसी वर्ग विशेष को ये सुविधा देना गलत था। अम्बेडकर लगभग चीखते बोला कि वह आरक्षण पर अटल था। अगर उसे रोका गया तो वह कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे देगा। पटेल को अम्बेडकर के कमरे से बाहर आना पड़ा और उन्होंने नेहरू से कहा, "आपने किस बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बना दिया, ये तो मानसिक उन्मादी प्रतीत होता है। इसमें दूरदर्शिता की भारी कमी है और अंग्रेज़ियत मानसिकता की गन्दगी भरी है। अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो कब का  इसे इसके पद से हटा चुका होता। ये व्यक्ति भारत का दुर्भाग्य साबित होगा। तन से ज्यादा इसका मन काला है। हम हर गरीब दलित के हक़ की बात करने को तैयार है, लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं की भूखे मर रहे सवर्णों की क़ुरबानी दे दी जाये?"
ये सुनकर नेहरू रहा। 
इसके परिणाम स्वरूप जो चपरासी की योग्यता भी नहीं रखते वही डॉक्टर, जज, इंजिनियर जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे हैं। 
जो अमित-मोदी बात-बात पर पटेल का नाम लेते हैं, वही वोटों के लिये आरक्षण के पक्षधर बने बैठे है। न माया को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर कुछ सीखा और न बिहार में 56 इंच की छाती का ब्यान देकर, राष्ट्रीय स्वयं सेवकों की बात को ठुकराकर। [13.04.2018]
RESERVATIONS-A CURSE ON GENERAL CATEGORIES :: Padriwala-the judge of Gujrat High Court, who said that reservation and corruption are pulling the country backwards, has deleted the remarks over a petition filed by the government. Disgruntled leaders of Congress like Diggi Bhaiya have signed a petition for the impeachment of the judge in Rajya Sabha. These politicians of all hue are torturing the upper castes especially the Brahmns. The judge's observations are true and deserve whole hearted appreciation and support. At last some one in judiciary gathered courage to speak the truth. Sooner or later the Swarn-upper caste will have to trow away the politicians who support reservations.[19.12.2105]
Debacle of Bihar for BJP has a lot to do with reservations. Bhagwat desired to scrape them just before the elections and Modi favoured them just in between. Bhagwat alienated the lower class and Modi infuriated the upper class.[14.11.2015]
This is curious that the NDMC, GNCT, Delhi and the Central Government still promotes the non deserving employees and they failed to revert them. Employees must approach the High Court or CAT. The NDMC has hundreds of such teachers and principals, who deserve to be demoted. 
RESERVATION IN PROMOTIONS :: (1). It has been struck down in at least 3 cases by the Hon. Supreme Court of India. Up has started implementing the judgement and reverting those who were promoted through reservation. Still is practice is going on in the central government offices, MCD, NDMC and the GNCT, Delhi. This menace continues due to extreme corruption and political interference. Sooner or later the political parties will have to face repercussions. 
The general category has to wake up rise, unite and give fitting reply to those who advocate reservations.
(2). The Supreme Court has ruled that if there is only one vacancy, it can not be reserved. It has rejected the appeal for review of its order pertaining to reservations in promotions. It ruled that section 3(7) of 1994 and section 8(a) of 2007 had been dismissed. It rejected the argument that the states are empowered to grant reservations under section 16(4)(a). Sub section "a" was added in 1995 with the motive of granting reservations. Court did not want to go into the merits of this and said that if it had found the these sections illegal in 2012, nothing can be done now. Employees who were promoted on the basis of reservations must be reverted back.[29.09.2015]
मेहनत न करने वाले, मन्दबुद्धि, विवेकहीन को आरक्षण देना कहाँ तक उचित है?! एक बेहद गरीब ब्राह्मण मेधावी छात्र को  नौकरी न देना कहाँ का न्याय है। जो आरक्षण मात्र 10 साल के लिए दिया गया था, उसे आज 69 वर्ष बाद भी कायम रखना कहाँ का न्याय है ?! माया, खड़गे, यादव सिंह जैसे बेईमानों को आरक्षण किस लिए!? आरक्षण की वैसाखी से नौकरी पर लगा काम कितना-कैसे करता है, यह किसी से छिपा नहीं है। आरक्षण के आधार पर तरक्की पाने वालों ने अपने से वरिष्ठों के साथ अन्याय-घोर अत्याचार-अनैतिक व्यवहार ही किया है।  मगर वोट की राजनीति  में यह कौन सुनता-देखता-समझता है ?! और ये TV चैनल कब किसके उचित बयान को विवादास्पद बता दें कुछ पता नहीं। [21.09.2015]
ABOLISHING RESERVATION आरक्षण :: There is no reference-evidence of atrocities-untouchability-crime against the Shudr (Scheduled Castes) any wherein Purans-Veds or any of the scriptures. Sufficient evidence is available to show that all communities lived peacefully maintaining harmonious relations amongest themselves.
पुराणों-वेदों-शाश्त्रों  में अछूत-नीच ऊंच या उनसे भेद भाव का कोई प्रमाण नहीं मिलता। 
Advent of Islam, initiated-promoted conversions, enhancing the population of Muslims, from 1800 to 28 crores. Britishers-Europeans were not far behind; they too promoted conversions, which are still continuing unabated. Both these communities treated the converts as low-degraded people. Their policy of divide and rule, found tools in the people engaged in manual work, skilled jobs, reaping seeds of discord. 
आज इस क्षेत्र में 1,800 से 28,00,00,000 करोड़  मुसलमान पैदा हो चुका है। मुसलमान  शासकों और अंगेजों ने यह भेद भाव उत्पन्न किया। उनकी-फूट डालो और राज करो की नीति सफल रही और वर्तमान सरकारें भी उसी राह पर चल रही हैं।  
They constitute just 1/4th of Hindu population and 1/9th of total population in India. Grant of reservation in jobs, promotions, admissions in educational institutions and extending it further; is growing the seeds of discontentment-discord in 8/9th of the total population. 1/9th of population is encroaching upon the rights of 50%-60% of the population. The intelligent-laborious-hard working is denied opportunities. This is against the basic spirit of the constitution, which advocates of equal opportunity for everyone.
अनुसूचित जातियां हिन्दुओं का महज एक चौथाई  व कुल जनसँख्या का महज नौवा भाग हैं, मगर आरक्षण 50% से 60%. ये कैसी अंधेर गर्दी है। 
The moment members-representatives of these communities becomes Chief Minister, Lok Sabha Speaker, Cabinet Minister, President, the tag of Dalit-down trodden- backwards, lose its significance and is dropped automatically. They are rubbing their shoulders with each and every one in the society-where is discrimination against them? जो व्यक्ति राष्ट्रपति, लोकसभा का स्पीकर, राज्य का मुख्य मंत्री, केंद्र  में मंत्री बन जाता वह अनुसूचित कंहाँ रह गया। यह गन्दी राज नीति मात्र है।   
Reservation is like a dreaded disease, creating classes among classes, disillusionment-dissatisfaction-friction-caste conflict. Constitutional experts should voice their opinion against it, before it’s too late. The elected representatives should look forward to eliminate it, as soon as possible.
What is perturbing is that the descendants of Lord Shri Krishan are enjoying the fruits of reservation by claiming to be backwards  How can a person, who has reached the high office of Chief Minister, claim to be a backward.
भगवान श्री कृष्ण के वंसज भी खुद को पिछड़ा कह कर आरक्षण ले रहे हैं।
Now a Chief Minister and Multi Billionaire is calling himself backward just to be in chair. How tragic ! अब एक मुख्य मंत्री-खरबों की दौलत का स्वामी, पिछड़ा कैसे  हो गया ?
समय आ गया है कानून बदलने का-जागो भारत जागो। 
आरक्षण :: After Gurjars of Rajasthan, Patels of Gujarat have raised their banner for reservations. Earlier Jats did the same trick. Yadavs were not far behind. Congress supported the move to gain political mileage. The Hon. Supreme Court has been delivering judgments against reservations, repeatedly. Still the political class including the BJP has been vehemently supporting it for gains which never come to them. New POLITICAL AVTARS like BSP of MAYA-Kansi Ram emerge to snatch the fruits of this folly.
This is the most affluent community of Gujrat with 40 MLA's in the assembly in addition to the chief minister, deserve brick bates, for spreading non sense. Almost half: 22,000 motels in US belongs to them. The youngster leading the revolt against Modi and the nation, is below average in studies. He passed his graduation with grace marks. He has been touting guns in public and threatening of snatching reservations if not granted peacefully. The peaceful demonstration led to rioting and several deaths. This menace must be curbed, immediately. Nitish, Kejriwal or Togdia and even Shiv Sena who supports invite the wrath of major-general communities in future.[29.08.2015]
Poorest community in India is that of Brahmns, still surviving on donations, charity, begging alms in 21st century. There is no ends to its bows-difficulties-troubles. Reservations have added another hurdle in their way. They believe in idealism, liberation, relinquishment, detachment and the next abode. Their believe in pardon, purity, virtuousness, righteousness, honesty, asceticism, celibacy may not let them survive in the present world. The present world is pragmatic, materialistic full of tensions, worries, sorrow, pains. Still they will survive, since they survived the on slaught of Aurangzeb and cruel emperors, since the on set this Kalp. Another Parshu Ram may take incarnation as Kalki.
HOW DOES THE COMMUNITY VIEW RESERVATIONS

 
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पैर की जूती पैर में ही अच्छी लगती है सिर पर नहीं। बाँये पैर का जूता बाँये पैर में और दाँये का जूता दाँये पैर में ही पहना जाता है। सूअर गू खाता है और ये सूअर। गू का कीड़ा गू में मस्त। कोयला सौ मन साबुन रगड़ने पर भी गोरा नहीं होता। जिसे हराम का खाने की आदत हो, वो मेहनत करके कैसे खायेगा?! गधे को गाय नहीं बनाया जा सकता। काग पढ़ाये पिजरा पढ़ गए चारों वेद, सुध आयी जब कुटुम्ब की, रहे ढेड़ के ढेड़। ईसाई, बुद्ध, मुसलमान, सिख, आरक्षित होकर-बनकर भी, ये जैसे थे वैसे ही रहे!काग पढ़ाये पींजरा पढ़ गये चरों वेद, सुध आई जब कुटुम्ब की रहे ढेड़ के ढेड़। 



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