DIRTY INDIAN POLITICS (1) गन्दी भारतीय राजनीति :: GANDHI-NEHRU LEGACY

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DIRTY INDIAN POLITICS  (1) गन्दी भारतीय राजनीति  :: GANDHI-NEHRU LEGACY
A TREATISE ON POLITICS
By :: Pt. Santosh Bhardwaj 
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गाँधी ने देश के टुकड़े करवाकर ही चैन नहीं लिया, उसने बँटवारे के बाद भी मुसलमानों को देश में बनाये रखने के किये अनशन किये। मुसलमानों ने हिन्दुओं का कत्लेआम किया तब भी उसके कानों पर जूँ तक न रेंगी। लाखों सिख, हिन्दु, सिंधी, पंजाबी बेघर हो गये, अपने परिवारों से बिछुड़ गए पर उसे फर्क नहीं पड़ा। पूरी ट्रेन हिन्दुओं की लाशों से भरी दिल्ली पहुँची, तो उसे क्या! गुरुदत्त ने इसका सजीव चित्रण किया है। हिन्दुओं ने जबाब दिया तो भूख-हड़ताल और अनशन। उसके नामधारियों ने इसी नीति का अनुसरण कर रखा है और अधिसंख्यकों की दुर्गति हो रही है। मुलायम, ममता, लालू, राहुल, आजम, बुखारी, उबैसी, दाऊद, फारुख, शाहरुख़, आमेर, सलमान, कम्युनिस्ट जैसे लोग मजे कर रहे हैं और देश का बेडा गर्क कर रहे है। 
अगर भारत के सारे मुसलमान बँटवारे के साथ पाकिस्तान भेज दिए जाते तो :- राम मंदिर निर्माण में परेशानी न होती। न गोधरा की ट्रेन जलती, न गुजरात के दंगे होते। न मुजफ्फरनगर में बहनों के साथ छेड़खानी होती, न मुजफ्फरनगर दंगे होते। न मुम्बई में आज़ाद मैदान की रैली की हिंसा देखनी पड़ती। न कैराना में हिंदुओं को अपना घर छोड़ के भागना पड़ता। न आज डॉक्टर नारंग की मौत होती। न बंगाल, केरल और त्रिपुरा में हिन्दुओं की हत्याएँ हो रही होतीं! धारा 370 की जरूरत ही न होती। न कश्मीरी हिन्दु बेघर होते। न हज सब्सिडी पर धन की बर्बादी ही होती। देश में मन्दिर तोड़कर बनाई गई 4,500 गये निर्माण मुक्त हो गए होते। न आज देश को 20 करोड़ पाकिस्तान परस्त आबादी का बोझ झेलना पड़ता। म्यानमार ने तो अपना कैंसर काट के फेंक दिया, क्योंकि वहाँ तथा कथित सैकुलर नेता नहीं हैं। भारत मे जिस तरह जनसंख्या परिवर्तन हो रहा है, उससे साफ दिखता है कि देश 1947 से भी बड़े गृहयुद्ध की तरफ बढ़ रहा है, जिसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है, मगर रोकना शायद सम्भव न हो। धन्य हैं वो नेता जो गाँधी का नाम ले-ले कर सैकुलर वोट बटोरते हैं। अब तो BJP भी इस दौड़ में शामिल हो चुकी है। [05.10.2017]
Rahul is half Muslim and half Christian and still demands votes on secular basis. He visits temples to be fool Hindus. He claims to be an Indian and has a British pass port as well. Varun is half Muslim and half Sikh and is a member of BJP demanding favours for Rohinga Muslims. Why is he present in BJP?![29.09.2017]
GANDHI-गाँधी जी :: कोई साल ऐसा जाता है जब कि 12वीं कक्षा के हिस्ट्री के पेपर में गाँधी जी के ऊपर कोई सवाल न हो; परन्तु हमेशां ही ऐसा होता है, जब ज्यादातर बच्चों को उनके अज्ञान के कारण उस प्रश्न में शून्य या ज्यादा से ज्यादा 2-3 अंक प्राप्त होते हैं। देश की अधिकांश आबादी ये नहीं जानती कि गाँधी किस चिड़िया का नाम है।
फ्रायड ने साइको एनालिसिस के माध्यम से गाँधी जी-नेहरू के सम्बन्ध को गे-इज्म से जोड़ा और इस पर कांग्रेसियों ने खूब बबाल काटा । सारी दुनियाँ जानती है कि वे अपनी पत्नी को बा-माँ बुलाते थे और दो-दो युवतियों के साथ नंगे सोते थे। 
कांग्रेस अभी तक उनके नाम को भुनाने की नाकामयाब तरकीबें निकालती रहती है। फिरोज, इंदिरा, राजीव, संजय, सोनिया, प्रियन्का, राहुल के साथ गाँधी जोड़ दिया। क्या उनका कोई खून का रिश्ता है गाँधी के साथ-? कदापि नहीं!   
अंग्रेज भारत की सत्ता कमजोर हाथों में सौंपना चाहते थे, उन्हें गांधी जी मिले और गांधी जी को मिले जवाहर। अंग्रेजों ने अपनी डिवाइड एंड रूल की (-बांटों और राज करो) पालिसी में  गाँधी जी का बखूबी इस्तेमाल किया। 
एक समय ऐसा भी था जब गाँधी जी ने अंग्रेजों कि फौज में भारतीय लोगों को भर्ती करने के लिये बतौर एजेंट काम किया। 
गाँधी जी ने जीवन में ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे उनको महात्मा कहा जाये। खुशामदियों ने उन्हें न इंसान छोड़ा न महात्मा। 
ये कैसा अहिंसा का पुजारी था, जिनको 10,000 हिन्दुओं के कत्ल पर कोई दुःख नहीं होता था, मगर एक मुसलमान मर जाये तो वे अनशन करने बैठ जाते थे। 
गोली काण्ड (-1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के जिम्मेवार जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए।  गाँधी जी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्यु दण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गाँधी जी  की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गाँधी जी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जन सामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।
6 मई, 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गाँधी जी  ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में ने गाँधी जी ने खिलाफ़त आन्दोलन-जिसका मुल्क से कोई सरोकार नहीं था को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2,000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गाँधी जी के कानों में जूं तक नहीं रैंगी।इतना ही नहीं ने इस हिंसा का विरोध करना तो दूर, वरन् कातिलों को खुदा के बहादुर बन्दों के रूप में मान्यता दी।
***TRUE FACE OF GANDHI :: संसद में मोदी जी ने हामिद मियां पर तंज कसते हुए कहा था कि आपके परिवार के लोगों ने खिलाफत आंदोलन में भाग लिया था जिस पर हामिद मियां खींसे निपोरते रह गए, वही खिलाफत आंदोलन जिसका RSS और डॉ हेगड़ेवार ने विरोध किया था, तो आखिर क्या था खिलाफत आंदोलन? जिसे सुनते ही हामिद मियां और कांग्रेस असहज हो उठी? जानने के लिए पूरी पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।
खिलाफत जानने से पहले आइए पहले जरा खलीफा को जान लें, खलीफा एक अरबी शब्द है जिसे अंग्रेज़ी में Caliph (खलीफ) या अरबी भाषा मे Khalifah (खलीफा) कहा जाता है, तो कौन होता है खलीफा? खलीफा मुसलमानों का वह धार्मिक शासक (सुल्तान) होता है खलीफा का काम होता है युद्ध कर के पूरे विश्व पर इस्लाम का निज़ाम कायम करना (जो कश्मीर में बुरहान वानी करना चाहता था), यानी इस्लाम की ऐसी हुकूमत कायम करना जिसमे इस्लामिक यानी शरीया कानून चले और जिसमे इस्लाम के अलावा किसी और धर्म की इजाज़त नही होती है, जितने हिस्से या राज्य पर खलीफा राज करता है उसे Caliphate यानी अरबी भाषा में Khilafa (खिलाफा) कहते हैं, खलीफा यानी इस्लामिक सुल्तान और खिलाफा यानी इस्लामिक राज्य ।
1919-22 के दौरान Turkey यानी तुर्की में ओटोमन वंश के आखिरी सुन्नी खलीफा अब्दुल हमीद-2 का खिलाफा यानी शासन चल रहा था जो कि जल्दी ही धराशाई होने वाला था, इस आखिरी इस्लामिक खिलाफा (शासन) को बचाने के लिए अब्दुल हमीद-2 ने जिहाद का आवाहन किया ताकि विश्व के मुसलमान एक हो कर इस आखिरी खिलाफा यानी इस्लामिक शासन को बचाने आगे आएं, पूरे विश्व मे इसकी कोई प्रतिक्रिया नही हुई सिवाए भारत के, भारत के अलावा एशिया का कोई भी दूसरा देश इस मुहिम का हिस्सा नही बना, लेकिन भारत के कुछ मुट्ठी भर मुसलमान इस मुहिम से जुड़ गए और लाखों किलोमीटर दूर सात समंदर पार तुर्की के खिलाफा यानी इस्लामिक शासन को बचाने और अंग्रेज़ों पर दबाव बनाने निकल पड़े, जबकि इस समय भारत खुद गुलाम था और अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन अंतः 1922 में तुर्की से सुलतान के इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंका गया और वहाँ सेक्युलर लोकतंत्र राज्य की स्थापना हुई और कट्टर मुसलमानों का पूरे विश्व पर राज करने का सपना टूट गया, इसी सपने को संजोए आजकल ISIS काम कर रहा है ।
भारत के चंद मुसलमानों ने अंग्रेज़ी हुकूमत पर दबाव बनाने के लिए बाकायदा एक आंदोलन खड़ा किया जिसका नाम था खिलाफा आंदोलन (Caliphate movement) अब क्योंकि अंग्रेज़ी में लिखे जाने पर इसका हिन्दी उच्चारण खलिफत होता है (अरबी में caliphate को Khilafa, खिलाफा लिखते है) तो कांग्रेस ने बड़ी ही चतुराई से इसका नाम खिलाफत आंदोलन रख दिया ताकि देश की जनता को मूर्ख बनाया जा सके और लोगों को लगे कि यह खिलाफत आंदोलन अंग्रेज़ो के खिलाफ है, जबकि इसका असल मकसद purely religious यानी पूर्णतः धार्मिक था, इसका भारत की आज़ादी या उसके आंदोलन से कोई लेना देना नही था, कुछ समझ मे आया? कैसे शब्दों की बाज़ीगरी से जनता को मूर्ख बनाया जा रहा था, कैसे खलिफत को खिलाफत बताया जा रहा था, (ठीक वैसे ही जैसे Feroze Khan Ghandi (घांदी) को Feroze Gandhi (फ़िरोज़ गांधी) बना दिया गया) ।
उस समय भारत मे इतने पढ़े लिखे लोग और नेता नही थे कि गांधी नेहरू की इस चाल को समझ सकें, लेकिन इन सब के बीच कांग्रेस में एक पढ़ा लिखा शख्स मौजूद था जिसका नाम था डॉ. केशव बलिराम हेगड़ेवार, इस शख्स ने इस आंदोलन का जम कर विरोध किया क्योंकि खिलाफा सिर्फ तुर्की तक सीमित नही रहना था, इसका उद्देश्य तो पूरे विश्व पर इस्लाम की हुकूमत कायम करना था जिसमे गज़वा-ए-हिन्द यानी भारत भी शामिल था, डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस के गांधी और नेहरू को बहुत समझने की कोशिश की लेकिन वे नही माने, अंतः डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस के इस खिलाफत आंदोलन का विरोध किया और कांग्रेस छोड़ दी, तो अब समझ मे आया मित्रों की कांग्रेसी जो कहते हैं कि RSS ने आज़ादी के आंदोलन का विरोध किया था, तो वो असल मे किस आंदोलन का विरोध था? आप डॉ हेगड़ेवार की जगह होते तो क्या करते? क्या आप भारत को गज़वा-ए-हिन्द यानी इस्लामिक देश बनते देखते? या फिर डॉ साहब की तरह इसका विरोध करते?
1919 में खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ था और 1920 में डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस छोड़ दी और सभी को इस आंदोलन के बारे में जागरूक किया कि इस आंदोलन का भारत की आज़ादी से कोई लेना देना नही है और यह एक इस्लामिक आंदोलन है, जिसका नतीजा यह हुआ कि यह आंदोलन बुरी तरह फ्लॉप साबित हुआ औए 1922 में आखिरी इस्लामिक हुकूमत धराशाई हो गयी, मुस्लिम नेता इस से बौखला गए और मन ही मन हिन्दुओ और RSS को अपना दुश्मन मानने लगे और इसका बदला उन्होंने 1922-23 में केरल के मालाबार में हिन्दुओ पर हमला कर के लिया और असहाय अनभिज्ञ हिन्दुओ को बेरहमी से काटा गया हिन्दू लड़कियों की इज़्ज़त लूटी गई, जबकि इस आंदोलन का भारत या उसके पड़ोसी देशों तक से कोई लेना देना नही था ।
1923 के दंगों में गांधी ने हिन्दुओ को दोषी ठहराते हुए हिन्दुओ को कायर और बुजदिल कहा था, गांधी ने कहा हिन्दू अपनी कायरता के लिए मुसलमानों को दोषी ठहरा रहे हैं, अगर हिन्दू अपने जान माल की सुरक्षा नही कर सकता तो इसमें मुसलमानों का क्या दोष? हिन्दुओ की औरतों की इज़्ज़त लूटी जाती है तो इसमें हिन्दू दोषी है, कहा थे उसके रिश्तेदार जब उस लड़की की इज़्ज़त लूटी जा रही थी? कुलमिला कर गांधी ने सारा दोष दंगा प्रभावित हिन्दुओ पर मढ़ दिया और कहा कि उन्हें हिन्दू होने पर शर्म आती है, जब हिन्दू कायर होगा तो मुसलमान उस पर अत्याचार करेगा ही ।
डॉ हेगड़ेवार को अब समझ आ चुका था कि सत्ता के भूखे भेड़िये भारत की जनता की बलि देने से नही चूकेंगे, इसलिए उन्होंने हिन्दुओ की रक्षा और उनको एकजुट करने के उद्देश्य से तत्काल एक नया संगठन बनाने का काम शुरू कर दिया और अंतः 1925 में RSS की स्थापना हुई, आज अगर आप होली और दीवाली मानते हैं, आज अगर आप हिन्दू हैं तो सिर्फ उसी खिलाफत आंदोलन के विरोध और RSS की स्थापना की वजह से वरना जाने कब का गज़वा-ए-हिन्द बन चुका होता।[15.08.2017]

1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप गाँधी जी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर, उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।
गाँधी जी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।
गाँधी जी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरी सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
यह ही गाँधी जी  ही थे जिन्होंने एक शराबी-कबाबी-चैन स्मोकर मोहम्मद अली जिन्ना जैसे घटिया वकील को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी जी  कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया, किन्तु गाँधी जी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन किया, जिसके फलस्वरूप निरन्तर विरोध व असहयोग के चलते सुभाष चन्द्र बोस  ने  पदत्याग कर दिया।
लाहौर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु  की गाँधी जी जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गाँधी जी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
मोहम्मद अली जिन्ना ने  गाँधी जी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गाँधी जी ने अस्वीकार कर दिया।
जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गाँधी जी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला। भारत में 3500 से ज्यादा मस्जिदें ऐसी हैं जिनको मंदिर तोड़ कर बनाया गया था। आज भी विश्वनाथ व कृष्ण जन्म भूमि का अधिकांश भाग मुसलमानों के कब्जे में है। 
पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो  ने गाँधी जी  उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया, किन्तु गाँधी जी  ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया-फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।
गाँधी जी ने गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया। 
द्वितीय विश्व युध में  गाँधी जी ने भारतीय सैनिको को ब्रिटेन का लिए हथियार उठा कर लड़ने के लिए प्रेरित किया, जबकि वो हमेशा अहिंसा की पीपनी बजाते थे। 
क्या 50,000  हिंदूओं  की जान से बढ़ कर थी मुसलमान की 5 वक्त की नमाज़ ?!
विभाजन के बाद दिल्ली की जमा मस्जिद मे पानी और ठंड से बचने के लिए 50000 हिन्दुओं ने जामा मस्जिद मे पनाह ले रखी थी। मुसलमानों ने इसका विरोध किया। हिन्दुओं को भी अपनी जाने ज़यादा कीमती लगीं।  गाँधी जी ने उनके वहाँ रुकने पर एतराज जाहिर किया  और बरसते पानी में मजबूर लोगों को पुन: विस्थापित करने को मजबूर किया। गाँधी जी धरने पर बैठ गये।  जब तक हिन्दुओं को मस्जिद से भगाया नही गया तब तक तब तक गाँधी जी ने धरना खत्म नहीं किया। पुलिस ने मजबूर हो कर उन हिदुओं को मार मार कर बरसते पानी मे भगाया। (-और वो हिंन्दु-गाँधी मरता है तो मरने दो-के नारे लगा कर वहाँ से भीगते हुए गये थे; रिपोर्ट-जस्टिस कपूर, सुप्रीम कोर्ट-फॉर गाँधी वध क्यों ?) भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च 1931 को फांसी लगाई जानी थी, सुबह करीब 8 बजे। लेकिन 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी गई और शव रिश्तेदारों को न देकर रातों रात ले जाकर ब्यास नदी के किनारे जला दिए गए। असल में मुकदमे की पूरी कार्यवाही के दौरान भगत सिंह ने जिस तरह अपने विचार सबके सामने रखे थे और अखबारों ने जिस तरह इन विचारों को तवज्जो दी थी, उससे ये तीनों, खासकर भगत सिंह हिंदुस्तानी अवाम के नायक बन गए थे। उनकी लोकप्रियता से राजनीतिक लोभियों को समस्या होने लगी थी।गाँधी जी और जवाहर ने उनके मुकदमें की पैरवी तक करना पसंद नहीं किया। उनकी लोकप्रियता महात्मा गाँधी जी को मात देनी लगी थी। कांग्रेस तक में अंदरूनी दबाव था कि इनकी फांसी की सज़ा कम से कम कुछ दिन बाद होने वाले पार्टी के सम्मेलन तक टलवा दी जाए। लेकिन अड़ियल महात्मा ने ऐसा नहीं होने दिया। चंद दिनों के भीतर ही ऐतिहासिक गांधी-इरविन समझौता हुआ, जिसमें ब्रिटिश सरकार सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर राज़ी हो गई। सोचिए, अगर  गाँधी जी ने दबाव बनाया होता तो भगत सिंह भी रिहा हो सकते थे, क्योंकि हिंदुस्तानी जनता सड़कों पर उतरकर उन्हें ज़रूर राजनीतिक कैदी मनवाने में कामयाब रहती। लेकिन गाँधी जी दिल से ऐसा नहीं चाहते थे, अन्यथा भगत सिंह के आगे इन्हें किनारे होना पड़ता। 
नाथू राम गोडसे को फाँसी जितनी जल्द बाजी में दी गई, उससे तो लगता है की  राज को छुपाने कि कोशिश की गई थी। हिन्दुस्तान में खून के मुकदमें सालों साल चलते रहते हैं। और फाँसी rare-rest of rare case में ही दी जाती है। इस केस में तो रेयर भी कुछ नहीं था, रेअरेस्ट की बात ही क्या ? फिर आपा-धापी किस लिए थी ? पहला सिद्धान्त है, खून का फायदा जिसको होना है, खून वो करेगा। तो देखो फायदा किसे था ?THE REAL GANDHI गाँधी का असली चेहरा :: 
(1). अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया। 
(2). भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।
(3). 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
(4). मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
(5  ).1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।
(6). गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।
(7). गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
(8 ). यह गान्धी ही था, जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
(9). कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
(10). कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।
(11). लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
(12). 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
(13). मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।
(14). जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
(15). पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
(16 ). 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।
(17). गाँधी ने गौ हत्या पर पर्तिबंध लगाने का विरोध किया। 
(18). द्वितीया विश्वा युध मे गाँधी ने भारतीय सैनिको को ब्रिटेन का लिए हथियार उठा कर लड़ने के लिए प्रेरित किया,  जबकि वो हमेशा अहिंसा की पीपनी बजाते हैं।
 (19). क्या 50,000 हिंदू की जान से बढ़ कर थी मुसलमान की 5 टाइम की नमाज़ ?
विभाजन के बाद दिल्ली की जमा मस्जिद मे पानी और ठंड से बचने के लिए 50,000  हिंदू ने जामा मस्जिद मे पनाह ले रखी थी…मुसलमानो ने इसका विरोध किया पर हिंदू को 5  टाइम नमाज़ से ज़यादा कीमती अपनी जान लगी.. इसलिए उस ने माना कर दिया. .. उस समय गाँधी नाम का वो शैतान बरसते पानी मे बैठ गया धरने पर कि  जब तक हिंदू को मस्जिद से भगाया नही जाता तब तक गाँधी यहा से नही जाएगा। फिर पुलिस ने मजबूर हो कर उन हिंदू को मार मार कर बरसते पानी मे भगाया और वो हिंदू, गाँधी मरता है तो मरने दो, के नारे लगा कर वहाँ से भीगते हुए गये थे। [ रिपोर्ट :: जस्टिस कपूर, सुप्रीम कोर्ट, फॉर गाँधी वध क्यो ?]
(20). भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च 1931 को फांसी लगाई जानी थी, सुबह करीब 8 बजे। लेकिन 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी गई और शव रिश्तेदारों को न देकर रातोंरात ले जाकर ब्यास नदी के किनारे जला दिए गए। असल में मुकदमे की पूरी कार्यवाही के दौरान भगत सिंह ने जिस तरह अपने विचार सबके सामने रखे थे और अखबारों ने जिस तरह इन विचारों को तवज्जो दी थी, उससे ये तीनों, खासकर भगत सिंह हिंदुस्तानी अवाम के नायक बन गए थे। उनकी लोकप्रियता से राजनीतिक लोभियों को समस्या होने लगी थी। उनकी लोकप्रियता महात्मा गांधी को मात देनी लगी थी। कांग्रेस तक में अंदरूनी दबाव था कि इनकी फांसी की सज़ा कम से कम कुछ दिन बाद होने वाले पार्टी के सम्मेलन तक टलवा दी जाए। लेकिन अड़ियल महात्मा ने ऐसा नहीं होने दिया। चंद दिनों के भीतर ही ऐतिहासिक गांधी-इरविन समझौता हुआ जिसमें ब्रिटिश सरकार सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर राज़ी हो गई। सोचिए, अगर गांधी ने दबाव बनाया होता तो भगत सिंह भी रिहा हो सकते थे क्योंकि हिंदुस्तानी जनता सड़कों पर उतरकर उन्हें ज़रूर राजनीतिक कैदी मनवाने में कामयाब रहती। लेकिन गांधी दिल से ऐसा नहीं चाहते थे क्योंकि तब भगत सिंह के आगे इन्हें किनारे होना पड़ता.
गाँधी उवाच :- (1-i). शहीद-ए-आजम भगतसिंह को फांसी दिए जाने पर अहिंसा के महान पुजारी ने कहा, "हमें ब्रिटेन के विनाश के बदले अपनी आजादी नहीं चाहिए।’’ (1-ii). ‘‘भगत सिंह की पूजा से देश को बहुत हानि हुई है। फाँसी इसका परिणाम और गुण्डा गर्दी पतन है। ऐसे बदमाशो को फांसी शीघ्र दे दी जाए ताकि 30 मार्च से कराची में होने वाले कांग्रेस अधिवेशन में कोई बाधा न आवे"। गाँधी के अनुसार किसी भारतीय राष्ट्र भक्त को फाँसी देना हिंसा नहीं थी। अगर हिन्दु मरे तो हिंसा नहीं और अंग्रेज या मुसलमान  मरे तो हिंसा। 
(2) . महान क्रान्तिकारी जतिनदास को जब आगरा में अंग्रेजों ने शहीद किया तो गाँधी आगरा में ही थे और जब  गाँधी को उनके पार्थिक शरीर पर माला चढ़ाने को कहा गया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया था।
(3).  जब सन् 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष के लिए नेताजी सुभाष और गाँधी द्वारा मनोनीत सीता रमैया के मध्य मुकाबला हुआ तो गाँधी ने कहा, "यदि रमैया चुनाव हार गया तो वे राजनीति छोड़ देंगे, लेकिन उन्होंने अपने मरने तक राजनीति नहीं छोड़ी जबकि रमैया चुनाव हार गए थे"।
(4). गाँधी ने कहा था, “पाकिस्तान उनकी लाश पर बनेगा” लेकिन पाकिस्तान उनके समर्थन से ही बना । 
(5). गाँधी और कांग्रेस ने दूसरे विश्वयुद्ध में अंग्रेजों का समर्थन किया, तो फिर क्या लड़ाई में हिंसा नहीं नहीं थी ?
(6). गांधी ने अपने जीवन में तीन सत्याग्रह आन्दोलन चलाए और तीनों को ही बीच में वापिस ले लिया गया। ऐसे दिलाई आजादी गाँधी ने। 
(7) .जब देश के महान सपूत उधमसिंह ने इंग्लैण्ड में माईकल डायर को मारा तो गांधी ने उन्हें पागल कहा जिसके कारण नीरद चौधरी ने गाँधी को दुनियां का सबसे बड़ा सफल पाखण्डी कहा।
(8). इतिहासकार मजूमदार ने ने लिखा कि “भारत की आजादी का सेहरा गाँधी के सिर बांधना सच्चाई से मजाक होगा। यह कहना कि सत्याग्रह व चरखे से आजादी दिलाई बहुत बड़ी मूर्खता होगी।
NET STORIES :: (1). This document is said to have been written-authored in Mumbai on 11th Oct. 2005 by  R. V. Bhasin, Advocate Supreme Court.
(1.1). Phiroz Khan, son of Nawab Khan was a Muslim and married Indira after converting her to Islam in 1941 in a London mosque, when inter religious marriage were illegal. Indira was the daughter of Jawahar Lal Nehru and she became a Muslim by the title MAINUNA BEGUM. Muslim couple Phiroz Khan and Maimuna Begum adopted the Gandhi surname and are called themselves Phiroz Gandhi and Indira Gandhi just to be-fool the masses. Phiroz Khan Son-in-law of Jawahar Lal was buried on his death in a Muslim grave yard at Allahabad. Rajiv Gandhi was a born Muslim who married the Italian Roman Catholic Antonia Maino who was a barmaid in UK. Antonia Maino now calls herself Sonia Gandhi. Indira Gandhi when she was Prime Minister of India visited Afghanistan and went to the grave of the 1st Mogul Emperor Babar, where she was heard saying that his descendents were still ruling India. 
(1.2). One is aware of the fact that one can change one's religion and even one's own name by following some simple legal procedure. One could recall how Phiroz Khan, son of one Nawab Khan changed his description from Phiroz Khan to Phiroz Gandhi when he married to Indira Gandhi daughter of  Jawahar Lal Nehru and grand daughter of  Moti Lal Nehru.
(1.3). It is learnt that Indira Gandhi on marrying Phiroz Khan changed her religion from Hinduism to Islam. They are learnt to have married in one London Mosque. Indira Gandhi is further learnt to have changed her name to MAINUNA BEGUM. This happened in 1941 when inter religious marriages were illegal and to make them lawful one of the two spouses had to change one's religion. The females always undergo change of their family surnames to accept the surname or the family of their husbands.
(1.4). The Nehru Dynasty got popular with the father of Jawahar Lal Nehru, Moti Lal Nehru. They are known to have their ancestors. Moti Lal's father was one Ganga Dhar and who were his ancestors could only be traced out from the research following the surname of KAUL, it is a common Kashmiri Brahman Gotr that helps in tracing backwards one's ancestral pedigree. However their connection with this Brahman dynasty could not be established.
(1.5). How the surname of KAUL came to be changed definitely to Nehru (something totally different and never existing before) in case of Moti Lal and Jawahar Lal  is intriguing. The word Nehru does his have a hidden word of NAHAR meaning the CANAL which used to flow Chandni Chowk. Between the present monument of Red Fort and the Mosque presently called FATEH PURI on the other end of the present day CHANDNI CHOWK, Delhi used to have a canal instead of what one sees at present in the old Delhi. 
(1.6). There are many grounds to doubts the paternity of Jawahar Lal Nehru. Jawahar Lal Nehru's father was either the famous lawyer of Allahabad Mubarak Ali or the Nawab of Oudh in whose house Jawahar Lal grew up till he was ten years of age and was later sent to the Harrows (The second in England) and later to the Trinity college also in England. Jawahar Lal Nehru prominently wrote HE IS PROUD TO BE REARED UP AS AN ISLAMIST AND AN ENGLISH MAN BY EDUCATION AND HE IS HINDU BY AN ACCIDENT.
(1.7). Mubarak Ali, the lawyer is said to have refused the so called women or wife of Moti Lal to give the delivery of her first child at his house i.e., the Ishrat Manzil that was changed into Anand Bhawan when Moti Lal moved into that house after winning a legal cause for the Rani of Etawah at the Privy Council at London. This was done both by Moti Lal and the famous lawyer Mubarak Ali who lost Rani of Etawah's case both in the lower court as well as in the High Court of Allahabad. By way of legal fee the Rani of Etawah is said to have given by way of legal fee to the above named two persons Rs. 10 Lakhs and also the estate of Amethi which she owned and was passed on to Moti Lal Nehru. For the reason all Nehrus decide Amethi as their inheritance from their ancestors and decide to contest elections from there.
(1.8). Mir Ganj area in Allahabad is a well-known Red Light area since long. It is not considered as any decent person’s good address. Mr. A. Ghosh referring to Moti Lal Nehru calls him as a brothel keeper. It is there that the Aristocrat Muslims used to visit that area for the purposes of prostitution. Moti Lal is further said to have offered the woman he brought from Kashmir, his so called wife i.e., the mother of Jawahar Lal Nehru to his own boss Mubarak Ali under whom Moti Lal worked as a Mukhteer when he was only a poor man serving persons like his boss and others. Jawahar Lal Nehru is said to have grown up and reared up as an Islamist in the palace of Nawab of Oudh. His education is England could never be thought of or paid for by Moti Lal Nehru who acquired his riches only on being paid by the Rani of Etawah the legal fee that run in  Lakhs of rupees and the estate of Amethi which could not have been of any great value in those days. The Isharat Manzil (Haveli in Allahabad) was either gifted by its owner Mubarak Ali to Moti Lal or it is possible that he bought it from the owner at the price, which he could then afford. Rumours remain that the costs involved for the Nehru family to move to England from education and medical purposes was paid for by the Nawab of Oudh and or by Mubarak Ali, the owner and seller of the Haveli called the Ishrat Manzil. There is another 'Haveli' also by the similar name of Ishrat Manzil in Allahabad whose owner was one Akbar Allahabadi.
(1.9). It is a fact worth taking note of that when Jawahar Lal Nehru became the Prime Minister of India, he had his original house of birth in Mir Ganj, Allahabad razed. Hathi Singh and Vijay Lakshmi were also born there. While some early childhood pictures of these three sisters of Nehru have been seen but none of the boy Jawahar Lal Nehru is found.
(1.10). Mr. A. Ghosh curiously wants to examine why Jawahar Lal Nehru as the Prime Minister of India saw to it that the house in which he was born located at Mir Ganj in Allahabad was destroyed? Why, he did not do anything before he became the Prime Minister of India? Admittedly Mir Ganj is the Red light area of Allahabad where Mubarak Ali, the employer of Moti Lal frequently visited for undesirable purposes. Why even on the request of Moti Lal, he refused to let wife of Moti Lal deliver her first child who was Jawahar Lal himself in the Ishrat Manzil that was later remained as Anand Bhawan? Mr. Ghosh seriously doubted the paternity of Jawahar Lal who according to him was a bastard child either of Mubarak Ali or of the Nawab of Oudh who frequented this house before the wife of Moti Lal became pregnant? Further, it is well known that Phiroz Khan Son-in-law of Jawahar Lal was buried on his death in a Muslim grave yard at Allahabad. None important is said to have been present when Phiroz was buried and hence none can throw any light if the wife of Phiroz i.e. Indira and her sons and her father were at all present on his death at the time of his burial? Recently some nephews of Phiroz published a letter to the press that the grave of Phiroz in the Allahabad grave yard remains unattended and uncared for? 
(1.11). Mr. Ghosh’s papers reveal that Jawahar Lal Nehru did setup his legal practice office at Malabar Hill Bombay near the then chambers of Mr. Mohammed Ali Jinnah. He was not successful in his legal practice. He had to wind it up as he got involved in a criminal case in which he is said to have attempted to molest a young Parsi girl employed in his office and it is further said that a criminal case against him proceeded in the then session’s court of Bombay. He wound up his legal practice and returned to Allahabad and joined the politics of those days.
(1.12). One Samar Sen a police officer of Bengal was provided by Dr. B. C. Roy (Chief Minister of Bengal who was deputed on the request of Jawahar Lal Nehru when he was the Prime Minister to engage in the activities of discovering some thing against Shri Shyama Prasad Mukherjee, he is said to have discovered a painting of Nawab of Oudh standing along side him in his palace at Oudh is a young boy who can be identified as the young Jawahar Lal Nehru.  There is a further discovery of things by this specially appointed and selected police officer who reported this fact to Dr. Shyama Prasad Mukherjee whom he admired as of his fans. He too is dead and his one son now alive is in Canada from whom some important old papers in this context have been received and they have helped to briefly set out the facts as above. 
(2). NEHRU FAMILY DETAILS :: The Nehru family starts with the Mughal man named Ghiyasuddin Ghazi. He was the City Kotwal i.e., police officer of Delhi prior to the uprising of 1857, under the Mughal rule. After capturing Delhi in 1857, in the year of the mutiny, the British were slaughtering all Mughals everywhere. The British made a thorough search and killed every Mughal so that there were no future claimant to the throne of Delhi. So, the man Ghiyasuddin Ghazi (the word means Kafir-killer) adopted a Hindu name Ganga Dhar Nehru and thus saved his life by the subterfuge. Ghiyasuddin Ghazi apparently used to reside on the bank of a canal (or Nahar) near the Red Fort. Thus, he adopted the name ‘Nehru’ as the family name. The 13th volume of the“Encyclopedia of Indian War of Independence” (ISBN:81-261-3745-9) by M.K. Singh states it elaborately. The Government of India have been hiding this fact.
JAWAHAR LAL NEHRU :: Jawahar Lal’s father was Moti Lal and Moti Lal’s father was Ganga Dhar Nehru. His wife was Kamala Kaul, who died in Switzerland of tuberculosis. M. O. Mathai in his book– “Reminiscences of the Nehru Age”-which opens secret of Jawahar Lal Nehru relationship with a Banaras girl. His relationship with several teens, Nehru was a playboy type, drinking wine, smoking with Edwina Mountbatten & others secretly. (Link :–http://www.sikhsundesh.net/nehru_dynasty.htm)
Nehru wrote letters to Edwina, after she left India, until her death. In his letters, Nehru often sought Edwina’s advice on matters of governance and strategy, according to British author Janet Morgan who was given access to the correspondence by the Mountbatten family. Morgan was given a small box weighing more than five pounds. The box contained all the letters Nehru wrote to Edwina between 1948 and 1960. A few of them even had a rose pressed between the pages. According to Morgan, in one of those letters, Nehru apparently wrote about the embarrassment V. K. Krishna Menon, India’s first high commissioner to the Court of St. James, had experienced. Pamela Mountbatten, daughter of Lord Mountbatten and Edwina, in an interview to Karan Thapar on Devil’s Advocate on CNN-IBN news channel, said that the Edwina-Nehru relationship was also of use to her father. Lord Mountbatten often appealed to Nehru, given the influence Edwina had; was particularly useful while handling tricky situations like Kashmir.
In a letter to his daughter, Patricia, Mountbatten wrote,“She and Jawahar Lal are so sweet together, they really dote on each other in the nicest way and Pammy and I are doing everything we can to be tactful and help. Mummy has been incredibly sweet lately and we’ve been such a happy family.”
Years later daughter Pamela Mountbatten Hicks, talked to the BBC another mother’s relationship with Nehru” :- It was a very very deep love that lasted for 12 years,” she said before refuting the rumour that they might have been lovers.”It was a really emotional
love. An affair one thinks of as physical. This was not…It was an amazing amazing friendship.”
Nehru wrote letters to Lady Mountbatten’s almost every day for the rest of her life. Lady Pamela Mountbatten Hicks, who read Nehru’s letters to her mother described them as “very tender”. (http://www.dnaindia.com/india/report_sonia-holding-back-nehrus-letters-to-edwina-vijaylakshmi-pandit_1338138)
After Lady Mountbatten’s death in 1960, she was buried at sea. Prime Minister Nehru sent a frigate from the Indian Navy to attend her funeral and cast a wreath into the ocean on his behalf. (http://en.wikipedia.org/wiki/Edwina_Mountbatten,_Countess_Mountbatten_of_Burma), (http://ridingtheelephant.wordpress.com/2008/10/07/nehru-was-lost-for-years-in-a-trunk-%E2%80%A6%E2%80%A6%E2%80%A6/), (YouTube Video Link Nehru-Edwina Relations–http://www.youtube.com/watch?v=PRN1YY6ECpw).
Also Nehru had love affair with Sarojini Naidu’s daughter Padmaja Naidu, whom Nehru got appointed as the Governor of Bengal. It is revealed that he used to keep her portrait in his bed room, which Indira would often remove. It caused some tension between father and daughter.
Also Nehru had an affair with a sanyasin from Benares named Shraddha Mata  in 1949, in a convent in Bangalore. A son was born and he was kept at a Christian Missionary Boarding School. His date of birth is estimated to be 30th May, 1949.
In 1929 Nehru father Motilal made a report , after that Muslims in India demanded new country.Then Jinnah who was in Congress Party was forced to join Muslim League.Nehru was so eager to take position of Prime Minister,created differences with Jinnah.Nehru even didn't thought of poor people who died in civil war between Hindus Vs Muslims. (Link:–http://www.activeboard.com/forum.spark?aBID=11931&p=3&topicID=5230238). 
Nehru-Jinnah were responsible for division of India because wanted to be Prime Minister of India. In 1948 he foolishly gave Kashmir matter to United Nations without caring people.It was Sardar Vallav Bhai Patel who made India as a Republic merged Hyderabad & Juna Gadh. Neta Ji Subhash Chandra Bose and Dr. Shyama Prasad Mukherjee were competitors of Jawahar Lal Nehru for the post of Prime Minister of India and both of them died under mysterious circumstances. 
(Link:–http://en.wikipedia.org/wiki/United_Nations_Security_Council_Resolution_47 )
The Great calcutta Killings 1946 , Noakhali & Trippeli masscare— those days Nehru was spending his honeymoon with Edwina in Shimla.
(http://noakhali1946.blogspot.com/http://www.bd71.blogspot.com/                                            Nehru wanted to be the Prime Minister of India, so he blackmailed Gandhi Ji that if he would not support him then would dissolved “Indian National Congress” & break India into 545 parts, that`s was the real plan of Britishers
Gandhi Ji always said that Congress party should be dissolved after independence but Nehru gained this for his political ambitions. Gandhi Ji was in Calcutta in 15th August, 1947 when Nehru was celebrating independence day in New Delhi.
He also refused to join UN offer of India`s permanent membership & gave this to China in 1950.
(Link:http://www.thehindubusinessline.com/2009/09/16/stories/2009091650380800.htm)
He was scared of truth, was trying to weak Indian Army. In 1961 he went to China & gave statement that Tibet is not a part of China but part of Indian occupied Tibet(Sikkim) is part of India , without boosting Indian Army, that brought China attack on India on 1962.
(Link:http://www.hindustantimes.com/StoryPage/Print.aspx?Id=cecc03dd-2d15-417e-8817-16cb0ca4b7fa#%23)
Government of India has not built a memorial of Jawahar Lal Nehru at his birth place 77 Mir Ganj in Allahabad, because it is a brothel. The entire locality is a well known red light area since long. It has not become a brothel recently, but it has been a brothel even before Jawahar Lal Nehru’s birth. A portion of the same house was sold by his father Moti Lal Nehru to a prostitute named Lali Jaan and it came to be known as “Imambada”. If you have some doubt, you may visit the place. Several dependable sources and also encyclopedia.com & Wikipedia say this. Moti Lal Nehru along with his family, later shifted to Anand Bhawan. Remember that Anand Bhawan is Jawahar Lal Nehru’s ancestral house and not his birth place.
As per the book “The great divide: Muslim separatism and partition” (ISBN-13:9788121205917) by S.C. Bhatt— Jawahar Lal Nehru’s sister Vijay Lakshmi eloped with her father’s employee Syud Hussain. Then Moti Lal Nehru forcefully took her back and got her married with another man named Ranjit Pandit.
Jawahar Lal Nehru’s second sister Krishna Hutheesing also mentions in her memoirs that her grand father was the city Kotwal of Delhi prior to 1857’s uprising when Bahadur Shah Zafar was still the sultan of Delhi. Jawahar Lal Nehru, in his autobiography, states that he have seen a picture of his grandfather which portrays him like a Mughal nobleman.The Urdu literature of the 19th century, especially the works of Khwaja Hasan Nizami, are full of the miseries that the Mughals and Mohammedans have to face then. They also describe how Mughals escaped to other cities to save their lives. In all probability, Jawahar Nehru’s Mughal grandfather and his family were among them.
AMETHI :: After death of Raja(king) of  Etawah (Uttar Pradesh), Rani (Queen) of Etawah wanted to save her kingdom because she had no child. she asked Mobarak Ali and Moti Lal to fight her case. They asked her for Rs.500,000. The Rani paid in full. The case was lost in the lower court. They then told the Rani that they would fight the case in the higher court. They took another Rs.500,000. The case was lost in the higher court also. They then told the Rani that they would fight the case in the Privy Council in London. They demanded up and down plane fare, a fat fee for themselves and a fee for a British advocate to fight the case in London. The smart British advocate said that the Rani could get hold of an infant of the appropriate age and say to the entire world that she was pregnant at the time of the Raja’s death. This idea worked and the Rani’s kingdom was saved.This stupid Rani thought that Mobarak Ali and Motilal had saved her. She gave them a lot of money and gave Amethi(uttar Pradesh),a part of her kingdom to Motilal. Ever since the members of the Nehru  family have been behaving as if Amethi is their private property.
INDIRA GANDHI:— Pridarshani Nehru (Indira Gandhi ) was admitted in Oxford University but driven out from there for non-performance. She was then admitted to Shantiniketan University but, Guru Dev Rabindra Nath Tagore chased her out for bad conduct.Jawaharlal Nehru only daughter was Pridarshani Nehru who later married to Feroz Khan ,was from the Junagadh area of Gujarat, a grocer supplied wines, etc. to Anand Bhavan, previously known as Ishrat Manzil, which once belonged to a lawyer named Mobarak Ali. Moti Lal Nehru was earlier an employee of Mobarak Ali. Feroze Khan, was then in England with pridarshani Gandhi , married in a London mosque. Feroze’s mother’s family name was Ghandy, often associated with Parsis and this was changed to Gandhi, sometime before his wedding with Indira Gandhi, by an affidavit.But Indira gandhi married to another man named Mohammad Yunus.After Rajiv’s birth Indira and Feroze lived separately, but they were not divorced. Indira Priyadarshini Nehru changed her name to Maimuna Begum.
The book “The Life of Indira Nehru Gandhi” (ISBN: 9780007259304) by Katherine Frank sheds light on some of Indira Gandhi’s other love affairs. It is written that Indira’s first love was with her German teacher at Shantiniketan. Later she had affair with M. O. Mathai (father’s secretary), then Dhirendra Brahmachari (her yoga teacher) and at last with Dinesh Singh (Foreign Minister).
Former Foreign Minister K Natwar Singh made an interesting revelation about Indira Gandhi’s affinity to the Mughals in his book “Profile and Letters” (ISBN: 8129102358). It states that- In 1968 Indira Gandhi as the Prime Minister of India went on an official visit to Afghanistan. Natwar Sing accompanied her as an IFS officer in duty. Indira Gandhi  visit Babur’s burial place and told Singh “Today we have had our brush with history.” Worth to mention that Babur was the founder of Mughal rule in India, from which the Nehru-Gandhi dynasty have descended.
How Indira Gandhi favours Dhirubhai Ambani , in the book , banned in India– “The Polyester Prince”.
DOWNLOAD BOOK FROM HERE:– http://www.ziddu.com/download/6202617/DhirbhaiAmbani.rar.html
In 1971 Indira Gandhi gave support to “Muktiwahanisena” in East Pakistan, she also ignored 40 Lakh illegal immigrants in North-East, now in West Bengal illegal Bangladeshi are more than 2 crore. Link:– http://en.wikipedia.org/wiki/Illegal_immigration_in_India
She also released 90,000 Pakistani soldiers in 1971 war without taking Indian soldiers who were captured by Pakistani Army.
This kind of ignorance & neglence on North-East india creates extremism & militancy in India in 1980s.
She also failed to stop huge amount of corruption that brought 1977 revolution under J.P. Narayan, but she arrogantly made emergency in 1977.
(Link:– http://en.wikipedia.org/wiki/The_Emergency_(India) )
It is a known fact that after Rajiv’s birth, Indira Gandhi and Feroze Gandhi lived separately, but they were not divorced. The book “The Nehru Dynasty” (ISBN 10:8186092005) by K. N. Rao states that the second son of Indira (or Mrs. Feroze Khan) known as Sanjay Gandhi was not the son of Feroze Gandhi. He was the son of another Muslim gentleman named Mohammad Yunus.
SANJAY GANDHI:–Incidentally, Sanjay Gandhi(a playboy) marriage with the Sikh girl Menaka (modeled for Bombay Dyeing wearing just a towel) took place in Md. Yunus( showed unhappiness in his book– ‘Persons, Passions & Politics’) house in New Delhi.
Interestingly Sanjay Gandhi’s marriage with the Sikh girl Menaka took place in Mohammad Yunus’ house in New Delhi. Apparently Yunus was unhappy with the marriage as he wanted to get him married with a Muslim girl of his choice. It was Mohammad Yunus who cried the most when Sanjay Gandhi died in plane crash. In Yunus’ book, “Persons, Passions & Politics” (ISBN-10: 0706910176) one can discover that baby Sanjay was circumcised following Islamic custom.
RAJIV GANDHI :: Rajiv Gandhi was son of Mohammad Yunus,changed his religion to become a Catholic to marry Sania Maino of Turin, Italy. Rajiv became Roberto. His daughter’s name is Bianca(priyanka) and son’s name is Raul(Rahul). he mislead people of India that he was a Mechanical Engineer but he not passes a single exam .He gave press conference in London after Prime Minister that he was a parsi but cremated as per vedic rites in full view of India’s public.
From 1962 to 1965, he was enrolled for a Mechanical Engineering course at Trinity College, Cambridge. But, he left Cambridge without a degree because, he could not pass exams. Next year in 1966, he joined Imperial College, London but, again left it without a degree.
When her mother Indira died in 1984 he has given full support to Congress supporters in Delhi to spread pogroms in Delhi , Gave huge amount of money, Liquors,Arms to Congressmen to spread violence against Sikhs only for vote-Bank politics, played with emotions of people.
In 1989 he also supported Ayodhya issue to gain Hindu Vote, later Congress Government ( P.V. Narshima Rao) ordered to demolish Babri Maszid.
In 1989 when Congress Government was in Centre & in Bhopal ,Rajiv Gandhi supported to flee Bhopal Gas Tragedy suspect Enron owner Quattorochi.
In 1990 he ordered Indian Army to do nothing against extremism , later terrorists killed thousands of Hindus in Kashmir , and 4 Lakh forced to migrate. Because at that time congress was in no mood to displease their vote-bank people & party .( Link:- http://www.hindujagruti.org/news/2038.html )
Sonia Gandhi had intense friendship with Madhavrao Scindia in the UK, which continued even after her marriage. One night at 2 AM in 1982,Madhavrao Scindia and Sonia Gandhi were caught alone together when their car met an accident near IIT Delhi main gate.
2-G scam in 2008 & swan-DB Reality group ties with etisilat grouo of Dubai where Underworld Don Dawood Ibrahim also invested
 http://en.wikipedia.org/wiki/D-Company
http://www.indianexpress.com/news/mha-expressed-concern-on-shahid-balwas-link-with-dawood-swamy/883664/
Sister of Sonia Gandhi  ,Anushka & Nadia also got benefit from 2-G scam—-
http://www.slideshare.net/naveenkumarjagatabi/corruption-in-india
http://janataparty.org/pressdetail.asp?rowid=60
First bofors scam in 1987 with Italian businessman & relative of sonia Gandhi family in Italy . Now 10 Billion defence deal corruption and planning to buy outdated fighter planes from Italy.
http://ajaishukla.blogspot.com/2011/11/end-this-mmrca-hara-kiri.html
http://defenceforumindia.com/indian-air-force/25854-decision-10-billion-mmrca-deal-soon-15.html
Sonia Gandhi and Mukesh Ambani involved in K-G Basin 10 Billion dollar scam.
http://indiatoday.intoday.in/story/cag-report-on-kg-basin-puts-ril-in-the-dock%E2%80%8E/1/150531.html
http://www.financialexpress.com/news/Reliance-violated-contract-terms-in-KG-Basin–finds-CAG-report/843940/
Also sonia Gandhi planning to target & kill Bihari-Hindus in Uttar-pradesh ,Bihar & Madhya-Pradesh by using ‘Communal Violence Bill”—http://www.votebankpolitics.com/pdfs/ssnacfir.pdf
Sonia Links with Zakir Naik who runs Islamic peace Foundation & PeaceTv ( Illegally running in India) & Links with Indian Mujhadeen—-
http://www.expressindia.com/latest-news/Stern-signal-on-broadcast-of-sensitive-channels/797070/
http://beta.thehindu.com/opinion/op-ed/article402892.ece
http://www.time.com/time/nation/article/0,8599,1927126,00.html
Congress General Secereatry Digvijay Singh in Peace Tv function——
http://www.youtube.com/watch?v=CZDtJ80iTRA
RAHUL GANDHI- In 1992, Sonia Gandhi revived her citizenship of Italy under Article 17 of the Italian Citizenship Law. Under Italian law, Rahul and Priyanka are Italian citizens because Sonia was an Italian citizen when she gave birth to them. Rahul Gandhi’s Italian is better than his Hindi. Rahul Gandhi is an Italian citizen is relevant from the fact that on 27th September 2001 he was detained by the FBI at Boston airport, USA for travelling on an Italian passport. (http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2005-03-09/india/27857680_1_pil-rashtra-raksha-manch-petition ) If  a law is made in India that important posts like that of President and Prime Minister should not be held by a person of foreign origin, then Rahul Gandhi automatically disqualifies to contend for the post of Prime Minister.
After finishing school education, Rahul Gandhi got admission at the St. Stephens College in New Delhi, not on merit basis but on sports quota of rifle shooting. After a brief stay there in 1989-90, he did his BA from Rollins College, Florida in 1994. Just for doing BA one need not go to the US. The very next year, in 1995 he got M.Phil. degree from Trinity College, Cambridge.                                                                             http://expressbuzz.com/nation/we-stand-by-rahul%E2%80%99s-mphil-story/64445.html                                                                                                                                     http://canarytrap.in/2009/04/15/truth-about-rahul-gandhi%E2%80%99s-mphil-2/
On Dec 31, 2004, John M. Itty, a retired college professor in Alappuzha district of Kerala, contended that action should be taken against Rahul Gandhi and his girlfriend Juvenitta alias Veronica for staying together for three days at a resort in Kerela.
On 3rd December 2006, Rahul Gandhi along with his foreigner friends gang raped then twenty four year old Sukanya Devi at a VIP Guest House in Amethi. She is the daughter of Balram Singh & Sumitra Devi of 23-12 Medical Choke, Sanjay Gandhi Marg, Amethi, Raebareli, Uttar Pradesh. Police refused to register complaint; the National Commission for Women headed by Dr. Girija Vyas acted as a Congress party office. The victim and her family is missing since then.
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-04-06/india/29388453_1_amethi-police-cbi-probe-mla
http://www.hotdiscovery.co/2011/08/rahul-gandhi-involved-in-gang-rape.html
(link– www.rahulgandhirapessukanya.blogspot.com )
In 2008 during 26/11 when the whole country was tense about how to tackle the Mumbai terror, Rahul Gandhi was lavishly partying with his friends till 5 AM. Rahul Gandhi advises austerity for all Congress members. He says it is the duty of all politicians to be austere. On the other hand he has a ministerial bungalow with a fully equipped gym. He is a regular member of at least two of the Delhi’s poshest gyms, one of which is 5-star rated. Rahul Gandhi’s trip to Chennai in 2009 to campaign for austerity cost the party more than Rs 1 Crore. Such inconsistencies show that initiatives taken by Rahul Gandhi are not his own but, workout of his party men only.
Schweitzer Illustrierte, a Swiss news magazine,published on 19th November 1991, has alleged in an old issue that the Soviet intelligence agency KGB had deposited US $2.2 billion in a Swiss bank account in 1985 in the “minor” account of Rahul Gandhi managed by his mother Sonia Gandhi. Janata Party President Dr Subramanian Swamy, who had secured an order from the Delhi High Court to the CBI to investigate alleged receipt of slush money by late former Prime Minister Rajiv Gandhi’s family, has cited a November 1991 issue of the Swiss magazine in support of his charge.He has further claimed that the payments were authorized by CPSU by a resolution CPSU/CC/No 11228/3 dated 20/12/1985 and the same was also endorsed by the USSR Council of Ministers in Directive No 2633/Rs dated 20/12/1985. He also claimed that these payments had been coming since 1971 as the payments received by Sonia Gandhi’s family “have been audited in CPSU/CC resolution No 11187/22 OP dated 10/12/1984.   LINK—-http://www.schweizer-illustrierte.ch/sites/default/files/SI-46-1991-Seiten-38-41.pdf
Reference:– http://swissprivacy.tripod.com/id8.html
http://www.scribd.com/doc/1777536/Nehru-Gandhi-Family-Secrets
( http://www.schweizer-illustrierte.ch/Titelstory.227.0.html)
Moti Lal Nehru had one real wife and 4 other illegal wives.
(1). Mrs Swaroop Rani (married wife) had two children with her. (2). Thussu Rahman Bai – already had 2 children from her previous marriage to Mubarak Ali (employer of Moti Lal Nehru) (3). Mrs. Manjari – had a child named Mehar Ali Shokat (Arya Samaj leader). (4). Iran's Whore – had a child named Muhammad Ali Jinnah. (5). Maid (Cook) – produced a child named Sheikh Abdullah (Kashmir Chief Minister).
(1). Mrs. Swaroop Rani (married wife), produced 2 children, Mrs. Krashna wife of Mr Jai Sukh Lal Hathi (Governor) & Mrs Vijay Laxmi Pundit wife of Mr. R. S. Pundit (High Commissioner of USSR). Earlier in life Vijay Laxmi eloped with her half brother Syed Hussain and had a daughter named Chandra Lekha who was adopted by Mr. Pundit. (2). Thussu Rahman Bai (ex wife of Moti Lal’s employer Mubarak Ali who died in mysterious circumstances) had 2 children, Jawahar Lal Nehru (Mubarak Ali was the real father). Moti inherited his wealth, business and kept his wife and children like a true Muslim) & Syed Hussein. Jawahar Lal marriage with Kamla Kaul never consummated as Kamla was Kashmiri Pundit and Nehru hated Hindu’s and only considered Muslim or English woman to be worth his appetite however he had changed this conception later on in his life as he had affairs with several Hindu woman. Mrs. Kamla Nehru was left leading a life of a maid in the house. So his brother Manzoor Ali kept Kamla Nehru the company and was able to produce a daughter named Indira Priy Darshani Nehru. Nehru didn’t really like Indira but because she was legally his daughter he had to support her in politics. Although she could not do much whilst Nehru was alive but managed to get up the ladder as a throne apparent. She tricked Shastri to go to Tashkent for conciliation meeting with Yahya Khan of Pakistan where she managed to get Shastri Ji poisoned and was declared dead. No autopsy or post mortem was conducted and it was reported that Shastri Ji had a cardiac arrest. Indira hooped on to the PM Chair quick as a buzz. Indira Priy Darshani Nehru alias Mamuna Begum Khan; w/o Jehan Gir Feroze Khan (Persian Muslims), who later changed his name to Gandhi on advice of Mohan Das Karam Chand Gandhi.
She had two sons Rajiv Khan (fathered by Feroze Jehan Gir Khan) and Sanjeev Khan (fathered by Mohammad Yunus, name later changed to Sanjay Gandhi, later), the third child was conceived from M. O. Mathai (PA of Jawahar Lal) had been aborted as she feared the child might turn out to be dark complexioned.
(3). Mrs. Manjari, had a son Mr. Mehar Ali Shokat (Arya Samaj leader).
(4). From a Iranian Whore, produced a son Muhammad Ali Jinnah.
(5). From Housekeeping (cook) produced Sheikh Abdullah (Kashmir Chief Minister). Sheikh Abdullah son was the father Farooq Abdullah ex. CM Kashmir Farooq’s son Omar Abdullah too became CM later.
Nehru divided India into 3 parts :- India (for Indira), Pakistan (for his half-brother Jinnah) and Kashmir (for his half-brother, Sheikh Abdullah).
Now this is called strategic planning and placement. Nehru's mind was brilliant! His step father Moti Lal Nehru and his step grand father father Ghiyasuddin Ghazi's of Yamuna canal (Nahar-flowing through Chandani Chowk) who fled Delhi after Mutiny of 1857 and went to Kashmir. There he decided to change his name to Gangadhar Nehru (Nahar became Nehru) and put Pundit as prefix to give people no chance to even ask his caste. With a cap (topi) on his head Pundit Gangadhar Nehru moved to Allahabad. His son Moti Lal completed a degree in Law and started working for a Law firm. His employer Mubarak Ali died in mysterious circumstances. So, Moti grabbed the opportunity of marrying his widow who came with a lot of wealth and 2 sons (Jawahar Lal and Syed Hussain).
Just imagine, India had 3 three former prime ministers from one family and the fourth Rahul is in the making!
Sincerely adopted from the biography of MO Mathai (Jawahar Lal Nehru's personal assistant).

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