AYURVED: CHAPTER (III) आयुर्वेद: अध्याय MEDICINAL PROPERTIES OF INDIAN SPICES भारतीय मसालों के औषधि गुण


AYURVED: CHAPTER (III) आयुर्वेद: अध्याय 
  MEDICINAL PROPERTIES OF INDIAN SPICES
भारतीय मसालों के औषधि गुण 
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM  By :: Pt. Santosh Kumar Bhardwaj  
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Indian spices are consumed the world over, from time immemorial. They have established medicinal properties. In fact they are Ayurvedic medicines. They not only make the food tasty, add fragrance, but also gives protection to the human body, as well. One must not consume them, beyond a certain limit.
SPICES मसाले 
Alkanet: रतनजोत (-Ratanjot), Alum: फिटकरी (-Phitkari), Anise:  छोटी सौंफ (Choti Saunf), Aniseeds: विलायती सौंफ (-Vilayati Saunf), Asafetida: हींग (-Heeng), Bay Leaf: तेजपत्ता (-Tej Patta), Bicarbonate Soda: मीठा सोडा (-Meetha Soda-Sodium bi carbonate), Black Cardamom: बड़ी इलायची (-Badi Elaychi), Caraway Seeds: शाहजीरा (-Shahjeera), Cardamom: छोटी इलायची (-Choti Elaychi), Carom Seeds, Thyme Seeds, Bishop Weed, Oregano: अजवाइन (-Ajwain), Cassia: जंगली दाल चीनी (-Jangali Dalchini), Castor: अरंडी (-Arandi), Cayenne Pepper: लाल मिर्च पाउडर (-Lal Mirch Powder), Red Chilly Powder: लालमिर्च पाउडर (Lal Mirch Powder), Cinnamon: दालचीनी (-Dalchini), Cloves: लौंग (Laung, Lavang), Coriander Seeds: साबूत धनिया (Sabut Dhania), Cumin: जीरा (-Jeera), Curry Leaf: कड़ी पत्ता (Meetha  Neem, Kadhi Patta), Dill: सोया (Soya), Dried Ginger: सौंठ (-Saunth), Dried Pomegranate: अनारदाना (-Anardana), Fennel: सौंफ (Saunf), Fenugreek Dry: कसूरी मेथी (-Kasoori  Methi), Garcinia Indica: कोकम (-Kokum), Green Chilly: हरी मिर्ची (-Hari Mirch), Holy Basil: तुलसी (Tulsi), Jaggery: गुड़ (Gur), Lemon zest /Peel: नींबू का छिल्का (Nimbu ka Chilka), Long Pepper: पिप्पली (Pippali), Mace: जावित्री (Javitri), Mango Powder: खटाई (Khatai, Amchoor Powder), Mustard Seeds: राई, सरसों (-Rai, Sarsoan), Nigella/ Onion Seeds: कलौंजी (Kalaunji), Nutmeg: जायफ़ल (Jaiphal), Paprika: देगी मिर्च, कश्मीरी मिर्च (Degi Mirch, Kashmiri Mirch), Poppy Seeds: ख़सखस (Khaskhas, Khus khus), Rock Salt: काला नमक (Kala Namak), Saffron: केसर (Kesar), Sesame White: सफेद तिल (Safed Til), Sesame Black: काला तिल (Kale Til), Star Anise: चकरा (Chakra), Tamarind: इमली (Imli), Turmeric: हल्दी (Haldi), Vetiver: केवड़ा (Kewra), Vinegar: सिरका (Sirka).


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NUTMEG जायफल 
जायफल ना केवल एक मसाला अपितु एक गुणकारी औषधि भी है। आयुर्वेद में इसे वात एवं कफ नाशक बताया गया है। उत्तेजक होने के कारण यह आमाशय में पाचक रस बढ़ाता है, जिससे भूख खुलती है। आंतों में पहुंचकर यह  गैस हटाता है। इससे कई बीमारियों में लाभ के साथ-साथ सौन्दर्य सम्बन्धी कई समस्याओं से निजात मिलती है।
* सुबह-सुबह खाली पेट आधा चम्मच जायफल चाटने से गैस्ट्रिक, सर्दी-खांसी की समस्या नहीं सताती है। पेट में दर्द होने पर चार से पांच बूंद जायफल का तेल चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।
* सिर में बहुत तेज दर्द होने पर जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।
* सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल का एक टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहिये।यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है
* भूख बढ़ाने के लिये  चुटकी भर जायफल चूसने से पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी और भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।
* दस्त या पेट दर्द की शिकायत में एक जायफल को भून कर उसका चौथाई भाग मरीज को 
सुबह शाम चूसने के लिए दें।  
* फालिज-लकवे का प्रकोप जिन अंगों पर हो, उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए। दो माह तक ऐसा करने से, अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।
* प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द ठीक हो जाएगा।
* फटी एडियों के लिए इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भरने से वे 15 दिन में ही ठीक हो जाती हैं।

* जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय स्वस्थ मज़बूत व  पेट  ठीक रहता है।
* अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो, तो जायफल को पीस कर वहां तब तक लेप करिये जब तककि गाठ ठीक न हो जाये ।
* अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लगने पर उसे जायफल को पानी में घिसकर उसे पिलायें।
* जी मिचलाने पर जायफल को पानी में घिस कर पिलायें।
*  घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से यह नेत्र ज्योति बढ़ाता है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म करता है।
* यह शक्ति बर्धक है और आवाज में सम्मोहन उत्पन्न करता है।
* जायफल, काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है और कील-मुहांसे ख़त्म होते हैं। चेहरे और त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए, जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसकर लेप लगाने से त्वचा में निखार व झाईयों से निजात मिलेगी। चेहरे की झुर्रियां भी इस लेप से ठीक-दूर हो जाती हैं। इसे कच्चे दूध में घिसकर चेहरें पर  लगाने से  मुंहासे ठीक हो जाते हैं और चेहरे पर निखार आता है।
*  बार-बार पेशाब जाना पड़ता हो तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी के साथ निगलने से फायदा होगा। यह क्रम खाली पेट, 10 दिन दोहरायें।
* बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3 चुटकी, गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।
* आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए, सोते समय जायफल का लेप लगाकर सूखने पर इसे धो लें।ने से लाभ मिलता है।
* जायफल का लेप त्वचा पर लगाने से अनिंद्रा की शिकायत दूर होगी और त्वचा भी स्वस्थ व सुन्दर बनी रहेगी।
*  त्वचा पर चोट, नील और घाव के निशान हटाने के लिए जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे मालिश करने पर रक्त के संचार के ठीक होने के साथ-साथ शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।
* जायफल के लेप की जगह इसके तेल का भी प्रयोग भी किया जा सकता है।
* दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखने से दर्द  ठीक हो जाता है और दांत के कीड़े भी मर जाते हैं।
* पेट दर्द ठीक करने के लिए जायफल के तेल की 2-3 बूंदें  बताशे में टपका कर खाने से  आराम मिलता है।
* जायफल को पानी में पकाकर  गरारे करने से मुंह के छाले और गले की सूजन ठीक हो जाती है।
* जायफल पाउडर दूध में मिला कर लेने से सर्दी का असर ठीक हो जाता है।
* सरसों का तेल और जायफल का तेल 4:1 की मात्रा में मिलाकर दिन में 2-3 बार शरीर की मालिश करने से जोड़ों का दर्द, सूजन, मोच आदि में राहत मिलटी है और शरीर में  चुस्ती-फुर्ती-गर्मी आती है तथा पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।
* जायफल, सौंठ और जीरे का चूर्ण भोजन करने से पहले पानी के साथ लेने से गैस और अफारा नहीं होता।
*  
बवासीर से छुटकारा: दस जायफल देशी घी में अच्छी तरह सेंककर पीस-छान लें।  इसमें दो कप गेहूं का आटा मिलाकर घी में फिर सेकें।और शक्कर मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट एक-एक चम्मच खाएं। 
* नीबू के रस में जायफल घिसकर भोजन के बाद सेवन करने से गैस और कब्ज की शिकायत दूर होती है।
* दूध पाचन:  शिशु को यदि ऊपर का दूध न पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें, कुनकुना गर्म, शिशु को पिलाएँ। यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।
 सावधानी: ज्यादा मात्रा में सेवनकरने से यह मादक प्रभाव उत्पन्न करता है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर कपूर के समान होता है, जिससे चक्कर आना, प्रलाप आदि लक्षण प्रकट होते हैं।


 इलायची CARDAMOMS एला
 इलायची दो प्रकार की होती है-छोटी और बड़ी। यह भारत तथा इसके आस पास के गर्म देशों में मात्रा में उगाई जाती है। इसके पौधे हल्दी के पेड़ के सामान होते हैं | इलायची खाने में स्वादिष्ट होती है अतः इसका प्रयोग खाद्य पदार्थों में किया जाता है | छोटी इलायची की तासीर ठंडी है। इसका सेवन 1-3 ग्राम की मात्रा में किया जाता है। यह कफ, खांसी, श्वास व बवासीर नाशक है और ह्रदय एवं गले की मलिनता को दूर करती है। इसको खाने से मुख की दुर्गन्ध दूर होती है और जी का मिचलाना बंद हो जाता है।

Cardamom
* लगभग 10 ग्राम इलायची को 1 लीटर पानी में डालकर पकाएं। जब एक चौथाई शेष रह जाए, तब उसे उतारकर ठंडा कर लें। इस पानी को थोड़ी-थोड़ी देर में, घूँट-घूँट करके पीने से, हैजा व मूत्रावरोध रोगों में लाभ होता है।

* Cardamom Pods are of two varieties: Small & Large. 
* Used to flavor curries, masala chai and certain vegetables and desserts and is one of the components of Garam masala.
* Used for its strong but very pleasing flavor.
* छोटी इलायची के दानों को तवे पर भून कर पीस लें। इस चूर्ण को शहद या देसी घी में मिलाकर सुबह-शाम चाटने से, खांसी में लाभ होता है | 
 सावधानी:  अधिक मात्रा में उपयोग आँतों के लिए हानिकारक होता है। 


दालचीनी CINNAMON 

Its used for the sweet and pleasing flavor. It is the bark of the cinnamon tree and one of 
the spices in Garam masala. It is normally used to flavor curries, masala chai and certain vegetables and Indian desserts.
* इसका आमतौर पर मसालोँ में उपयोग होता है।  यह पेट रोग, इंफ्यूएंजा, टाइफाइड, टीबी और कैंसर जैसे रोगों में उपयोगी पाई गई है। दालचीनी का तेल बनता है। दालचीनी,साबुन, दांतों के मंजन, पेस्ट, चाकलेट, सुगंध व उत्तेजक के रूप में काम में आती है। चाय, काफी में दालचीनी डालकर पीने से स्वाद के साथ-साथ जुकाम भी ठीक हो जाता है।
* दालचीनी का तेल दर्द, घावों और सूजन दूर करता है।
* इसको तिल के तेल, पानी, शहद में मिलाकर उपयोग करना चाहिए। दर्द वाले स्थान पर मालिश करने के बाद इसे रात भर रहने देते है। मालिश अगर दिन में करें तो, 2-3 घंटे के बाद धोना चाहिये।
* यह त्वचा को निखारती है और खुजली के रोग को दूर करती है।
* यह सेहत के लिए लाभकारी है। यह पाचक रसों के स्त्राव को भी उत्तेजित करती है। यह दांतों को स्वस्थ रखने में भी उपयोगी है।
* रात को सोते समय नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी पाउडर शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
* दालचीनी का नियमित प्रयोग मौसमी बीमारियों को दूर रखता है।
* ठंडी हवा से होने वाले सिरदर्द से राहत पाने के लिए दालचीनी के पाउडर को पानी में मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाएं।
* दालचीनी पाउडर में नीबू का रस मिलाकर लगाने से मुंहासे व ब्लैक हैड्स दूर होते हैं।
* दालचीनी, डायरिया व जी मिचलाने में भी औषधी के रूप में काम में लाई जाती है।

Cinnamon

* मुंह से बदबू आने पर दालचीनी का छोटा टुकड़ा चूसें। यह एक अच्छी माउथ फ्रेशनर भी है।
* दालचीनी में एंटी एजिंग तत्व उपस्थित होते हैं। एक नीबू के रस में दो बड़े चम्मच जैतून का तेल, एक कप चीनी, आधा कप दूध, दो चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पांच मिनट के लिए शरीर पर लगाएं। इसके बाद नहा लें, त्वचा खिल उठेगी।
* दालचीनी पाउडर की तीन ग्राम मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ लेने पर दस्त बंद हो जाते हैं।
* आर्थराइटिस का दर्द दूर भगाने में शहद और दालचीनी का मिश्रण बड़ा कारगर है।
* गंजेपन या बालों के गिरने की समस्या बेहद आम है। इससे छुटकारा पाने के लिए गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। इसे सिर में लगाए और पंद्रह मिनट बाद धो लें।
* एक चम्मच दालचीनी पाउडर और पांच चम्मच शहद मिलाकर बनाए गए पेस्ट को दांत के दर्द वाली जगह पर लगाने से फौरन राहत मिलती है।
* सर्दी जुकाम हो तो एक चम्मच शहद में एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में तीन बार खाएं। पुराने कफ और सर्दी में भी राहत मिलेगी।
* पेट का दर्द-शहद के साथ दालचीनी पाउडर लेने पर पेट के दर्द से राहत मिलती है।
* खाली पेट रोजाना सुबह एक कप गरम पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से फैट कम होता है। इससे मोटे से मोटा व्यक्ति भी दुबला हो जाता है।


CLOVE लौंग
Used for its pleasing flavor. and is one of the spices in Garam masala. It easily loses its flavor and is used to flavor curries, masala chai and certain vegetables.
* यह भोजन का जायका-स्वाद  बढ़ाना और दर्द से छुटकारा, दोनों में ही लौंग फायदेमंद है। सर्दी-जुकाम से लेकर कैंसर जैसे गंभीर रोग के उपचार में लौंग का इस्तेमाल किया जाता है। 
Clove* मसाले के रूप में लौंग का इस्तेमाल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें प्रोटीम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें विटामिन ए और सी, मैग्नीज और फाइबर भी पाया जाता है।
* यह एक  बेहतरीन नैचुरल पेनकिलर है। इसमें मौजूद यूजेनॉल ऑयल दांतों के दर्द से आराम दिलाने में बहुत लाभदायक है। दांतो में कितना भी दर्द क्यों न हो, लौंग के तेल को उनपर लगाने से दूर हो जाता है। एंटीबैक्टीरियल गुणों की वजह से इसका इस्तेमाल  टूथपेस्ट, माउथवाश और क्रीम बनाने में किया जाता है।
फ्लेवोनॉयड्स अधिक मात्रा में होने से यह गठिया रोग में जोड़ों में होने वाले दर्द व सूजन से आराम के लिए भी लौंग का तेल बहुत फायदेमंद है। * लौंग के तेल को सूंघने से श्वास संबंधी रोगों-जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनसाइटिस में तुरंत आराम मिल जाता है।

* लौंग व इसके तेल में एंटीसेप्टिक गुण होने के कारण  फंगल संक्रमण, कटने, जलने, घाव हो जाने या त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं के उपचार में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
*  इसमें मौजूद तत्व 
पाचन संबंधी समस्याओं-अपच, उल्टी गैस्ट्रिक, डायरिया आदि समस्याओं से आराम दिलाने में मददगार हैं।

*  लौंग में मौजूद युजेनॉल नामक तत्व के कारण इसके इस्तेमाल से फेफड़े के कैंसर और त्वचा के कैंसर को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। 
* इसका सेवन शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है और रक्त शुद्ध करता है। इसका इस्तेमाल मलेरिया, हैजा जैसे रोगों के उपचार के लिए दवाओं में किया जाता है। डायबिटीज में लौंग के सेवन से ग्लूकोज का स्तर कम होता है। लौंग का तेल दर्द निवारण के साथ-साथ मच्छरों को दूर भगाने में सहायक है। 
सावधानी: लौंग का तेल सीधे त्वचा पर न लगाकर किसी अन्य तेल में मिलाकर करना चाहिए।



TURMERIC-हल्दी

यह प्रायः एक मसाले के तौर पर प्रयुक्त होती है। दूध में मिलाकर पिनें से यह जमे हुए खून को पतला करती है और दर्द से मुक्ति खिलाती है। यह एक कीटाणुनाशक भी है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक तत्व पाए गए हैं। यह सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। घाव पर हल्दी का लेप लगाने से वह ठीक हो जाता है। हल्दी-चुने के लेप से हड्डी का दर्द बहुत जलती निकलता है। चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है। एक चम्मच हल्दी में आधा चम्मच काला गर्म पानी के साथ फांखने से पेट दर्द व गैस में राहत मिलती है। इसका प्रयोग चन्दन और नीबू के साथ एक सौंदर्य वर्ध्रक के रूप में भी किया जाता है। 


GINGER-अदरक: 
यह स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसके नियमित प्रयोग से पेट ठीक रहता है। रोजमर्रा बनाई जाने वाली सब्जियों में अदरक का उपयोग अच्छा होता है। इससे शरीर के होने वाले वात रोगों से मुक्ति मिलती है।
* अगर किसी व्यक्ति को खाँसी के साथ कफ भी हो गया हो, तो उसे रात को सोते समय दूध में अदरक उबालकर पिलाएँ। यह प्रक्रिया क़रीबन 15 दिनों तक अपनाएँ। इससे सीने में जमा कफ आसानी से बाहर निकल आएगा। इससे रोगी को खाँसी और कफ दोनों में आराम होगा। रोगी को अदरक वाला दूध पिलाने के बाद पानी न पीने दें। 

सर सर्द एक आम बीमारी है। सिरदर्द हो रहा हो तो सूखी अदरक को पानी के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे माथे पर लगाएं। इसे लगाने पर हल्की जलन जरूर होगी लेकिन यह सिरदर्द दूर कर देगा।



CHILLIES

green chili peppersThe chili pods belong to the nightshade family of Solanaceae, within the genus; capsicumIts a  perennial small shrub with woody stem growing up to a meter height and bears white colored flowers; grown in India since ages. Its pods are very variable in size, shape, color, and pungency. Depending on the cultivar type, they range from the mild, fleshy, bell peppers to the tiny, fiery, finger-like chili peppers. 

Red chilies peppers are available throughout the year, like cayenne pepper to add zest to flavor  dishes around the world along with health. 

They cause burning sensation-strong spicy taste, over the tongue which usually  bring out tears in the eyes; due to the presence of active alkaloid compounds: capsaicin, capsanthin and capsorubinThe hotness of chili is measured in Scoville heat units (-SHU). On the Scoville scale, a sweet bell pepper scores 0, a jalapeño pepper around 2,500-4,000 units, and a Mexican habaneros have 200,000 to 500,000 units.

Chilly

Chilly (Powder/dried)

dry chili peppers with seedsIt contains numerous tiny, white, or cream colored, circular and flat seeds. The seeds are actually clinging around the central white-placenta. To harvest, chilies can be picked up while they are green or when they reach complete maturity and dried in the plant. Usually, the fruits are picked up by hand, when they are mature having turned red. They are dried in sunlight, which causes them to shrivel. 

CONTENTS: Vitamin E: 13.7%, Vitamin-A: 8.8%, Fiber: 7.5%, Vitamin-B: 66.4%, Vitamin-K: 6.3%, Copper: 5.5%, Iron: 5.1%, Manganese: 4.5%, Vitamin B-1 (-Thiamine):33.9%, Vitamin B-6 (-Pyridoxine): 23.8%, Potassium: 3%-7%. 100 gm fresh chilies provide about 143.7 µg or about 240% of RDA, a good source of Vitamin C. 

HEALTH BENEFITS

* Capsaicin-major content of chilies, has anti-bacterial, anti-carcinogenic, analgesic and anti-diabetic properties. It also found to reduce LDL cholesterol levels in obese individuals.

* They are also good in other antioxidants like vitamin A and flavonoids like ß-carotene, α-carotene, lutein, zea-xanthin and cryptoxanthin. These antioxidant substances in capsicum help to protect the body from injurious effects of free radicals generated during stress, diseases conditions. Presence of Vitamin A helps in curing troubles like night blindness and improves ability to fight off infections.
* Chilies contain a good amount of minerals like potassium, manganese, iron, and magnesium. Potassium is an important component of cell and body fluids that helps controlling heart rate and blood pressure. Manganese is used by the body as a co-factor for the antioxidant enzyme, super-oxide dismutase.
* Chilies are also good in B-complex group of vitamins such as niacin, pyridoxine (vitamin B-6), riboflavin and (vitamin B-1). These vitamins are essential in the sense that body requires them from external sources to replenish.

*Natural Pain Relief: Topical capsaicin is a recognized treatment option for osteoarthritis pain. Several review studies of pain management for diabetic neuropathy have listed the benefits of topical capsaicin to alleviate disabling pain associated with this condition. Patients having symptoms associated with psoriasis, when treated with capsaicin   showed significant improvement. 

*Cardiovascular Benefits: Red chili peppers, such as cayenne, have been shown to reduce blood cholesterol, triglyceride levels, and platelet aggregation, while increasing the body's ability to dissolve fibrin, a substance integral to the formation of blood clots. Cultures where hot pepper is used liberally have a much lower rate of heart attack, stroke and pulmonary embolism.

*Spicing  meals with chili peppers may also protect the fats in the blood from damage by free radicals-a first step in the development of atherosclerosis. Rate of oxidation (-free radical damage to cholesterol and tri-glycerides) is significantly lowered by the consumption of green chilies. Resting heart rate is reduced and amount of blood reaching the heart is enhanced.

*Clear Congestion: Capsaicin not only reduces pain, but also stimulates secretions that help clear mucus from stuffed up nose or congested lungs.

*Boost Immunity: Vitamin C coupled with vitamin A acts as anti-infection agent protects mucous membranes, which line the nasal passages, lungs, intestinal tract and urinary tract and serve as the body's first line of defense against invading pathogens. Carotenoids present in it  helps in improving insulin regulation.

Vitamin C is a potent water-soluble antioxidant. It is required for the collagen synthesis in the body. Collagen is the main structural protein in the body required for maintaining the integrity of blood vessels, skin, organs, and bones.  Vitamin C helps the body in the protection of body from scurvy; develop resistance against infectious agents (-boosts immunity) and scavenge harmful, pro-inflammatory free radicals from the body. Presence of vitamin C helps in fighting  anaemia, bleeding under the skin and horrible gum problems.

*Help Stop the Spread of Prostate Cancer: It stops the spread of prostate cancer cells. 

*Prevent Stomach Ulcers: It helps prevention of ulcers by killing bacteria ingested in the body, while stimulating the cells lining the stomach to secrete protective buffering juices.

*Lose Weight: Even sweet red peppers have been found to contain substances that significantly increase thermogenesis (-heat production) and oxygen consumption, leading to weight loss.

*Lowers risk of Type 2 Diabetes: It help in reducing hyper-insulinemia (-high blood levels of insulin), a disorder associated with type 2 diabetes. It result in a lower ratio of C-peptide-insulin, an indication that the rate at which the liver is clearing insulin has increased. 

WARNING: One must keep the level of chilies in the food to minimum possible.


CORIANDER धनिया 
Coriandrum sativum - Köhler–s Medizinal-Pflanzen-193.jpgBINOMIAL NAME: CORIANDER SATIVUM 
SCIENTIFIC CLASSIFICATION
KINGDOM: Plantae, (Angiosperms, Eudicots, Asterids)
ORDER: Apiales
FAMILY: Apiaceae
GENUS: Coriandrum
SPECIES:  Sativum
The most common use of coriander is in curry powders. It is an essential ingredient of garam masala गर्म मसाला, pickling spices and pudding spices and also used in cakes, breads and other baked foods. Besides being used as a fragrant flavor, Coriander seeds also have a health-supporting reputation.
 NUTRITIONAL VALUE (-per 100 g):
Energy: 95 (23 k cal), Carbohydrates: 3.67 g, Sugars:  0.87, Dietary fiber: 2.8 g, Fat: 0.52 g, Protein: 2.13 g.
VITAMINS: Vitamin A: 337 μg, Thiamine (B-1):0.067 mg, Riboflavin (B-2):    (14%) 0.162 mg, Niacin (B-3): 1.114 mg, Pantothenic acid (B-5)0.57 mg, Vitamin (B-6): 0.149 mg, Folate (B-9): 62 μg, Vitamin C: 27 mg, Vitamin E: 2.5 mg, Vitamin K: 310 μg.
TRACE METALS: Calcium: 67 mg, Iron: 1.77 mg, Magnesium: 26 mg, Manganese: 0.426 mg, Phosphorus: 48 mg, Potassium: 521 mg, Sodium: 46 mg, Zinc: 0.5 mg.
MAIN COMPONENT (-Water): 92.21 g.
CorianderHEALTH BENEFITS:
(3). DIABETES: It stimulates the production of insulin which helps in maintaining blood sugar. It reduces LDL (-bad cholesterol) and increases HDL (-good cholesterol) in the blood. Its used in traditional treatment for type 2 diabetes. It has been found that coriander extract initiates both insulin-releasing and insulin-like activity.
(4). ANTI BACTERIAL: Chemicals derived from coriander leaves were found to have antibacterial activity against Salmonella choleraesuis and this activity was found to be caused in part by these chemicals acting as non-ionic surfactants. Many food and water borne diseases like cholera, typhoid, food poisoning, dysentery etc. are caused by bacteria (-Salmonella). Essential oil produced from Coriandrum sativum has been shown to exhibit antimicrobial effects.
(5). ANEMIA: Iron is a measure component of hemoglobin, RBC's in the blood. Women are helped a lot by it after pregnancy due to rich iron. It cures the dark skin below the eye lids, formed due to deficiency of iron.
(6). DETOX REMEDY:  It's seeds contain natural compounds which help to detox the body and remove all the traces of heavy toxic metals like lead, arsenic, mercury, aluminium etc. which get accumulated in the body leading to serious health problems like Alzheimer’s disease, loss of memory, defective vision-eyesight, improper functioning of cardio-vascular and neurological system.
(7). EYE CARE: High antioxidant content reduces redness, itchiness and inflammation in the eyes due to conjunctivitis (-red soar eye).
(8). WOMAN'S HEALTH: It helps to prevent menstrual irregularities, if the seeds are boiled and the filtered extract is consumed thrice every day.  
(9). SKIN DISEASES: It's quite effective for curing various skin diseases like eczema, itchy skin, rashes and inflammation. Gargle with boiled coriander water reduces mouth ulcers and sores. Paste of coriander seeds with a little bit of water and a teaspoon of honey when applied cures itchy skin and rashes providing instant relief.
(10). PIMPLES: Anti-bacterial properties of coriander seeds work as an effective home remedy for pimples, acne and blackheads. Its paste made with honey and turmeric provides effective cure-treatment. 
(11). DARK LIPS: A mixture of coriander and lemon juice applied over the lips overnight for some days, turn the lips to pink.
(12). HAIR LOSS: A paste made of powdered coriander seeds and hair oil used to massage the  scalp at least twice a week prevents further hair fall and help stimulate the roots for the growth of new hair.
WARNING: Coriander can produce an allergic reaction in some people.


CUMIN-जीरा
SCIENTIFIC CLASSIFICATION:
KINGDOM: Plantae, Angiosperms, Eudicots, Asterids, ORDER: Apiales, FAMILY: Apiaceae, GENUS: Cuminum, SPECIES: Cyminum, BINOMIAL NAME: Cuminum Cyminum.

In Sanskrat, Cumin is known as Jeera (-जीरा) that helps in digestion of food. It’s the dried seed of Cuminum cyminum-a herb and a member of the parsley family. Its plant grows to a height of 30–50 cm and is harvested by hand. Its seeds have been used as a spice for taste, distinctive flavor and aroma. It can be used both in powdered form and whole seeds. It’s fried with onions to brown color before mixing vegetables or pulses in it. In some cases it fried till it turns black. Its fried to blackness and then added as a powder to yogurt.

MEDICINAL USES: In Ayurvedic system of medicine, dried Cumin seeds are used for medicinal purposes in different forms like kashy (-कष्य, decoction), arisht (-अरिष्ट fermented decoction), vati (-वटी गोली tablet, pills), and processed with ghee (-clarified butter). It is used internally and sometimes for external application also. It is known for its actions like enhancing appetite, taste perception, digestion, vision, strength, and lactation. It is used to treat diseases like fever, loss of appetite, diarrhea, vomiting, abdominal distension, edema and puerperal disorders.
Jal Jeera (-जल जीरा) is a popular drink in India, made by boiling cumin seeds in water. It is understood that cumin is beneficial for heart disease, swellings, tastelessness, vomiting, poor digestion and chronic fever. Jeera water is believed to improve saliva secretion, provide relief in digestive disorders.
METABOLITES:
Cuminaldehyde, cymene and terpenoids are the major volatile components of cumin. It   can be used as an antioxidant. The anti-oxidative potential is correlated with the phenol content of cumin. Cuminaldehyde has also antimicrobial and anti-fungal properties with Escherichia coli and Penicillium chrysogenum.

जल जीरा 
NUTRITIONAL COMPONENTS: 
Carbohydrates: 44.24 g, Sugars: 2.25 g, Dietary fiber: 10.5 g, Fat: 22.27 g, Saturated Fats: 1.535 g, Monounsaturated Fats:14.04 g, Polyunsaturated Fats: 3.279 g, Protein:17.81 g, Vitamins: Vitamin A equiv.- (8%) 64 μg, Beta-carotene-(7%) 762 μg, Vitamin A 1270 IU, Thiamine (B 1) (55%) 0.628 mg, Riboflavin (B2) (27%) 0.327 mg, Niacin (B 3) (31%) 4.579 mg, Vitamin B 6 (33%) 0.435 mg, Folate (B 9) (3%) 10 μg, Vitamin B 12 (0%) 0 μg, Choline (5%) 24.7 mg, Vitamin C (9%) 7.7 mg, Vitamin D (0%) 0 μg, Vitamin D (0%) 0 IU, Vitamin E (22%) 3.33 mg, Vitamin K (5%) 5.4 μg, Trace metals, Calcium (93%) 931 mg, Iron (510%) 66.36 mg, Magnesium (262%) 931 mg, Manganese (159%) 3.333 mg, Phosphorus (71%) 499 mg, Potassium (38%) 1788 mg, Sodium (11%) 168 mg, Zinc (51%) 4.8 mg
Other constituents: Water 8.06 g.

HEALTH BENEFITS
(1) DIABETES: It lowers blood sugar levels helping in maintenance of proper blood content levels in the body by increasing insulin level in the body, serving as a boon for people suffering from Diabetes.
(2) ANEMIA: Rich in Iron- an essential ingredient of blood it helps in the treatment of anemia by enhancing hemoglobin and RBC's in the blood.
(3). ASTHMA:  Thymoquinone present in it which reduces inflammatory processes and other mediators that cause asthma acting as a bronchodilator.
(4). IMMUNITY: Anti-oxidant and free radicals present in it makes the body immune against microbes. It is found to control metabolic activities as well.
(5). MENSTRUAL CYCLE: It helps in correcting the disorders pertaining to periods of women of all ages.
(6). CANCER: It is helpful in treating colon and breast cancer due to the presence of thymoquinone , dithymoquinone, thymohydroquinone and thymol which are anti-carcinogenic agents.
(7). COLD & RESPIRATORY DISEASES: Presence of Vitamin C helps in fighting common cold and resists microbes like fungus.
(8). DIGESTION: It can stimulate the production of pancreatic enzymes and helps in digestion.
(9). MEMORY LOSS: It’s protective against memory loss and the damaging effects of stress on the body.
(10). BOILS: Regular usage of cumin in the food helps in keeping skin free from boils, rashes, pimples etc. because of Cuminaldehyde, Thymol and phosphorus. Acne or boils may be treated by using powdered cumin with vinegar.
(11). SKIN DISORDERS: High content of Vitamin E keeps the skin healthy and glowing. Application of cumin paste on boils, pimples, eczema, psoriasis and other skin disorders helps in quick healing. Fiber helps in removing toxins. It acts as an anti-ageing agent.
(12). RELIEF FROM HEAT-LOO: Drinking cumin-Jeera water relieves the burning sensation of the palms and the soles. It is specially used in summers.
(13). FACE PACK: You can prepare a face pack by mixing Fine turmeric and cumin powder mixed in the ratio 3: 1 along with honey is used as a face pack. Jojoba oil is applied after washing off the face.
(14). HAIR PROTECTION: It helps to replenish hair, combat thinning of hair, baldness and falling hair if a mixture of black cumin oil and olive oil, is applied after a bath. Not only this it’s helpful growing long and shiny hair in addition to removing dandruff.


BLACK PEPPER-काली मिर्च 
* यह घरेलू नुस्खों से रोगों को भी ठीक करने के लिए भी प्रयोग की जाती है। 
* इसमें कैल्शियम, मैंगनीज, आयरन, फास्फोरस, कैरोटीन, थायमीन रिबोफ्लोवीन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन आदि पौषक तत्व पाये जाते हैं। 
Black-Pepper* इसमें मौजूद पिपराइन नामक यौगिक, त्वचा में पिगमेंट-रंग बनाने में सहायक होता है । यह विटिलिगो के कास्मेटिक्स से किए जाने वाले इलाज की अपेक्षा कहीं ज्यादा कारगर साबित होता है।यह एक एंटीऑक्सीडेंट भी है।
* यह उदरपीड़ा, डकार और अफारा मिटाकर कामोत्तेजना एवं विरेचन का कार्य करती है। 
* ये अरुचि, जीर्ण, ज्वर, दांत दर्द, मसूड़ों की सूजन, पक्षाघात, नेत्ररोग आदि में  भी हितकारी है।
* जुकाम होने पर काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर गर्म दूध के साथ करें।
* खांसी होने पर आधी-आधी चम्मच काली मिर्च और सौंठ का चूर्ण, शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटें। 
* गैस की शिकायत होने पर पानी में नीबू का रस, काली मिर्च का चूर्ण व काला नमक मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें।
 * गला बैठने पर काली मिर्च को घी और मिश्री के साथ मिलाकर चाटने से बंद गला खुल जाता है और आवाज़ साफ़ हो जाती है।
 * बारीक पिसी काली मिर्च, मुलहठी और मिश्री को शहद के साथ मिला कर खाने से गले की तकलीफ में लाभ होता है तथा आवाज भी साफ होती है। 
* काली मिर्च पानी में उबालकर इस पानी से गरारे करने  से गले का संक्रमण दूर हो जाएगा।
* त्वचा रोग  में काली मिर्च को घी में बारीक पीसकर लेप करने से दाद-फोड़ा, फुंसी आदि रोग दूर हो जाते हैं।
*  पिसी काली मिर्च घी के साथ मिला कर रोजाना सुबह-शाम नियमित खाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।
* पेट में कीड़े होने पर काली मिर्च को किशमिश के साथ 2-3 बार चबाकर खा जाएं। छाछ में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से भी पेट के कीड़े मर जाते हैं।
* पायरिया, कमजोर दाँत हों तो काली मिर्च को नमक के साथ मिलाकर दांतों पर लगाने से लाभ होता है। 
* वाय-गठिया  होने पर काली मिर्च को तिल के तेल में जलने तक गर्म करेंऔर ठंडा होने पर उस तेल को मांस पेशियों पर लगाने से दर्द में आराम मिलेगा।
* याददाश्त बढ़ाने के लिये काली मिर्च को शहद में मिलाकर खाएं।
* पेट में कांटा, कांच का टुकडा आदि चले जाने पर पके हुए अनन्नास के साथ काली मिर्च और सेधा नमक लगाकर खाने से पेट में गया हुआ कांच या कांटा निकल आयेगा। 
* कब्ज होने पर काली मिर्च के चार-पांच साबुत दाने दूध के साथ रात को लेने से कब्ज में लाभ मिलता है।
* मलेरिया होने पर काली मिर्च के चूर्ण को तुलसी के रस में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
* कम  ब्लड प्रेशर  होने पर कालीमिर्च के साथ किशमिश का सेवन करें। 
* काली मिर्च को सुई से छेद कर दीये की लौ से जलाएं। जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें। इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है। हिचकी चलना भी बंद हो जाती है। 
* काली मिर्च, जीरा और शक्कर या मिश्री कूट-पीस कर मिला लें। इसे सुबह-शाम पानी के साथ फांकने से  लें। बवासीर रोग में लाभ होता है।
* इसका प्रयोग नेत्र ज्योति में बडा सहायक होता है।  
* श्वास संबन्धी रोग, खांसी में इसका चूर्ण गुड में मिला कर चाटने से  आराम मिलता है। 
* पानी में तुलसी, काली मिर्च, अदरक लौंग और इलाइची को चाय के साथ उबाल कर पीने से जुखाम व बुखार में लाभ होता है।  
* नींबू के टुकडों से बीज निकालकर इसमें पिसा काला नमक और काली मिर्च पाउडर भर कर गर्म कर के चूसने से बदहजमी में लाभ मिलता है। 
*  गर्म पानी में पिसी काली मिर्च के साथ नींबू का रस मिला कर पीने से गैस की शिकायत दूर होती है। 
* आटे में देशी घी और शक्कर मिलाकर इसमें सफेद काली मिर्च का पाउडर मिला कर सुबह-शाम सेवन करने से अथवा त्वचा पर कहीं भी फुंसी उठने पर काली मिर्च पानी के साथ पत्थर पर घिस कर लगाने  से  फुंसी बैठ जाती है।
* कालीमिर्च, हींग, कपूर का (-सभी पांच-पांच ग्राम) मिश्रण बनाएं और राई के बराबर गोलियां बना कर तीन -तीन घंटे बाद एक गोली लेने से उल्टी, दस्त बंद हो जाते हैं। 

AJWAIN-CAROM SEEDS-BISHOP'S WEED
Beside being used as a culinary and aromatic spice in various cuisines, it's widely recommended for medicinal purposes like as a calming herb to ease intestinal colic, stimulating the appetite, treatment of diarrhea, bronchitis, bronchial asthma and in laryngitis as a gargle. Another main use has been to increase milk flow in nursing mothers. 
1. INDIGESTION:  It’s the only plant in the world with the highest amount of thymol-a chemical which is very effective in helping the stomach release gastric juices that speed up digestion. It corrects indigestion, flatulence, nausea and relieve colicky pain in babies.
2. PREGNANCY AND LACTATION: It helps to improve digestion, ward off constipation due to pregnancy and strengthens the muscles of the uterus, in expecting mothers. After pregnancy Ajwain is known to heal the woman’s body internally, reduce inflammation and helps maintain good blood circulation. It improve the production of milk in lactating mothers.
Carom3. COUGH AND ASTHMA: The thymol, present in it is a great local anesthetic, anti-bacterial and anti-fungal. It is known to relieve congestion due to formation of phlegm even in severe cases. 
4. RHEUMATIC AND ARTHRITIC PAIN: Due to its anti-inflammatory  and anesthetic properties, it helps in rheumatism and arthritis. Besides consuming it orally, its paste can be applied over the affected area for instant relief.
5. EAR ACHE: Due to its antiseptic properties Ajwain mixed with garlic and sesame oil, provides instant relief from ear ache. Ear ache due to congestion is relieved, if ajwain boiled in milk is consumed. 
6. APHRODISIAC: Drinking of a mixture of powdered Ajwain & Tamarind with honey, ghee and milk, helps in increasing vitality and libido.
7. PROTECTION OF HEART: Presence of niacin and thymol, in it along with other vitamins, helps in preserving heart. It improve nerve impulses and overall circulation of blood. Consumption of boiled Ajwain in hot water on an empty stomach regularly protects the heart from diseases.
8. HICCUPS: Due to it's ability to reduce inflammation and soothing of nerves, it's used to stop hiccups instantly. 
9. ACIDITY: A mixture of powdered Ajwain & Jeera helps in relieving acidity. The thymol content helps release stomach acids which helps reduce the regurgitation of acids. 
10. MIGRAINE:  Sniffing the fumes of Ajwain or applying its paste on the head helps relieve the pain due to migraines. When the seed is burned or crushed into a poultice, it releases its essential oils high in thymol content, which provides a pain relieving-soothing effect.
METHI मेथी FENUGREEK 
 This is a basic but not essential Indian spice which is actually a lentil and is used for its strong, bitter taste. After turmeric it has the most medically useful item in the Indian kitchen.कढ़ी, काशीफल जैसी गैस-वायु बनाने वाली सब्जियों में इसका उपयोग अत्यावश्यक है। 
Fenugreek-(Semen-FoenugraecIt has a long history of medical uses in Indian and has been used for numerous indications, including labor induction, aiding digestion, and as a general tonic to improve metabolism and health.
1. SKIN INFLATION: Methi seeds serve as an effective topical treatment for a variety of skin-related problems. It can treat boils, abscesses, eczema, muscle pain, burns and gout among other problems. It can relieve local inflammatory pain and swelling when used as a poultice.
2. ACNE-BLACKHEADS-WRINKLES: It can be safely applied over the face by mixing it with honey as a mask to treat  cystic acne, blackheads and wrinkles effectively.  It draws out toxins accumulated underneath the epidermis and tones the outer layers of the skin. Ingestion and external application of this is useful to help one get that desired glow over the skin.
3. ANTI AGING: It's a natural anti-ageing remedy. It combats free radicals in the body; repairs damaged skin cells; and regenerates new ones, effectively. All of these together help delay the signs of ageing like wrinkles, age spots, fine lines and blemishes.
4. EXFOLIATES & LIGHTENS SKIN: Its used to lighten the complexion along with treating-curing under-eye dark circles
5. PREVENTS SUN BURNS: It effectively protects the skin from sun burns-cosmic radiations-ultra violet light. It treats skin blemishes under the eyes, as well. 
6. HAIR GROWTH:  It can be incorporated in diet or applied directly on hair in the form of a paste.It contain proteins and nicotinic acid which are a great source for hair growth. It contains large amounts of lecithin which makes the hair healthy and strong, and hydrates the hair. It helps to reduce the dryness of the hair, cures dandruff, acts against baldness, conditions the hair, prevent premature graying, keeps the scalp cool and treats a variety of scalp issues. It is highly effective against hair fall and provides strength from the roots.
It's extremely effective in strengthening the hair from the roots and treating follicular problems. The seeds contain hormone antecedents that enhance hair growth and help in rebuilding the hair follicles. The lecithin in methi helps in strengthening dry and damaged hair. The natural tonic helps in moisturizing the hair and bringing back the luster and bounce. This is why methi seeds for hair growth has been an ancient technique prevalent in India.
7. BLOOD CHOLESTEROL: It helps  helps in lowering the cholesterol level, specially the bad cholesterol or LDL & reduces the risk of cardiovascular disease. Its consumption can lower the risk of heart attacks. Due to its high potassium content, it counters the action of sodium to effectively control your blood pressure.
8. DIABETES: Controls Diabetes: Its beneficial to the people who are affected by Type 2 diabetes. It contains galactomannan which is a natural soluble fiber and this decreases the rate at which sugar is absorbed into the blood. It contains amino acids which induce insulin production. 
9. HEART BURN & ACIDITY: Due to the presence of high quantities of mucilage, its consumption helps soothe digestive inflammation by coating the lining of our stomach and intestine. 
10.  DIGESTION: Its seeds have a high content of Vitamin A and C, calcium, iron, proteins, carbohydrates and trace minerals. It provides an effective treatment for gastritis and indigestion. It helps prevent constipation & digestive problems created by stomach ulcers. Its known to detoxify the liver as well.
11. WEIGHT LOSS: Its seeds are known to induce weight loss by suppressing appetite. Seeds soaked overnight and chewed  in the morning with an empty stomach, contains natural fiber which swells inside and gives a feeling of fullness, thereby helping to suppress one’s appetite and in turn induces weight loss. 
12. FEVER & SORE THROAT: When its consumed thrice a day with a teaspoon of lemon and honey, fever is reduced. Due to the presence of mucilage, it also has a soothing effect, helping to relieve the pain of a sore throat.
13. BREAST ENLARGEMENT: Women with flat chest or small breast may try this natural remedy, as  balance the hormones with its oestrogen like properties.
14. LACTATION: Diosgenin contained in methi seeds helps to increase milk production in lactating mothers. Hence, this is essential for nursing mothers. It contains phyto-estrogen, & diosgenin which boosts milk production in lactating mothers.  Its extract is well known to stimulate uterine contraction, which helps to speed up and ease childbirth.  Use this remedy only after consulting the doctor.
15. WOMEN'S HEALTH PROBLEMS: It's known to relieve menstrual cramps, hot flushes, discomfort and moodiness due to its calming effect on the hormonal system. It's very effective in treating the symptoms of menopause like hot flashes, insomnia and anxiety.
16. PROTECTS KIDNEY: It immensely aids the prevention and treatment of painful kidney stones by reducing calcification in the kidney and flushing it out via urine.
17. PREVENTS BLOOD CLOTTING & HYPERTENSION: Being an amazing liver detoxifier, it purifies the blood and prevent clotting of blood. It also benefits people suffering from hypertension. 
18. PREVENTS CANCER: Diosgenin, a compound found in it is believed to have anti-carcinogenic properties, which may help to ward off cancer cells. The saponins present in the seeds inhibit bile salts re-absorption and toxins in the food to protect the colon mucous membranes from cancer.
19. ANTI OXIDANTSThe antioxidants in it act as a scavenger to destroy the free radicals found in the body.
20. PREVENTION OF RESPIRATORY PROBLEMS: It disperses mucus from the respiratory tract to cure bronchitis. It also benefits people suffering from chronic sinusitis by clearing the sinuses. A gargle prepared from its seeds can be very helpful in treating sore throats
PRECAUTION-CAUTION: Nausea & gastrointestinal discomforts like gastritis and diarrhea are common side effects associated with its consumption. Side effects like bloating, flatulence may also be there, if  consumed orally. It can also cause a mild skin irritation if, applied topically. People suffering from anemia should avoid its consumption as it may interfere with iron absorption. It can also cause thyroid imbalance, so avoid taking it if one is suffering from a thyroid problem. It contains mucilaginous fiber which has the potential to interfere with the absorption of oral medication. If one is under medication, he should consume this herb at least two hours before or after the medicines. Children below 2 years should not be given this in any form. 

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